Haryana News: हरियाणा की सियासत में इन दिनों सूरजमुखी की फसल को लेकर तल्खियां बढ़ गई हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सीधे तौर पर सरकार और हैफेड को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश का किसान एक बार फिर ठगा महसूस कर रहा है।
मामला सूरजमुखी के खरीद मूल्य में की गई भारी कटौती से जुड़ा है। चौटाला का कहना है कि एक तरफ केंद्र सरकार ने साल 2025-26 के लिए सूरजमुखी का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 7721 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था लेकिन जब हरियाणा के मंडियों में खरीद की बात आई तो इसे घटाकर महज 6540 रुपये कर दिया गया।
यह अंतर कोई मामूली नहीं है। एक झटके में भाव को करीब 1181 रुपये नीचे ले आना किसी भी किसान की कमर तोड़ने के लिए काफी है।
दुष्यंत चौटाला ने इसे किसानों के साथ सीधा धोखा करार दिया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यह रेट पिछले साल के मुकाबले भी लगभग 740 रुपये कम है। यानी समय आगे बढ़ रहा है, महंगाई बढ़ रही है लेकिन किसान की उपज की कीमत पीछे की ओर जा रही है।
बोनस की उम्मीद थी और मिल गया घाटा
ग्राउंड पर स्थिति यह है कि बीते कुछ समय में बेमौसम बारिश और बदलती आबोहवा ने खेती की लागत को दोगुना कर दिया है। डीजल से लेकर खाद और मजदूरी तक, हर चीज महंगी हो चुकी है।
ऐसे मुश्किल वक्त में हरियाणा का किसान उम्मीद लगाए बैठा था कि सरकार उसे लागत पर कुछ बोनस देकर राहत पहुंचाएगी। लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट।
चौटाला ने तीखे लहजे में कहा कि जब लागत बढ़ रही हो, तब सरकार को चाहिए था कि वह एमएसपी पर अतिरिक्त आर्थिक मदद दे, लेकिन यहाँ तो घोषित एमएसपी से भी कम पर खरीद की तैयारी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार के ऐसे ही फैसले होते हैं जो शांत बैठे किसान को मजबूरन सड़कों पर उतरने और आंदोलन करने के लिए धकेल देते हैं। अगर किसान के पसीने की सही कीमत नहीं मिली तो प्रदेश में एक बार फिर विरोध की आग सुलग सकती है।
रसोई पर भी वार
बात सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही। दुष्यंत चौटाला ने ग्रामीण जीवन से जुड़ी एक और बड़ी समस्या पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ रसोई गैस की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर भरवाने की अवधि को 45 दिन तय करना पूरी तरह तर्कहीन है।
गांवों में बड़े परिवार होते हैं और वहां ईंधन की खपत शहर के मुकाबले अलग तरह की होती है। ऐसे में समय की यह पाबंदी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर देगी।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने मांग की है कि सरकार को किसानों के हित में सूरजमुखी के पुराने रेट बहाल करने चाहिए और गैस सिलेंडर से जुड़े इन जनविरोधी फैसलों को तुरंत वापस लेना चाहिए।

