Breaking News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे और उसके ठीक बाद ईरान पर हुए भीषण हमले ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी थी।
भारत की भूमिका को लेकर उठ रहे कयासों के बीच अब केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दो टूक कहा है कि ईरान पर हुई सैन्य कार्रवाई की भारत को कोई ‘एडवांस’ जानकारी नहीं थी।
टाइमिंग को लेकर उठ रहे थे सवाल
दरअसल, पीएम मोदी 25 और 26 फरवरी 2026 को इजरायल के ऐतिहासिक दौरे पर थे जहां साइबर सुरक्षा और AI समेत 16 अहम समझौतों पर मुहर लगी। इसके ठीक दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया।
इस इत्तेफाक ने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया था कि क्या भारत को इस मास्टरप्लान का पता था?
लेकिन सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल ने इस हमले पर भारत से कोई चर्चा नहीं की थी।
ट्रंप का दावा बनाम ईरान की धमकी
युद्ध के मैदान से आ रही खबरें डराने वाली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान की परमाणु शक्ति अब इतिहास बन चुकी है और युद्ध अंतिम चरण में है।
ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ईरान सीजफायर की गुहार लगा रहा है। दूसरी ओर ईरान ने इन दावों को ‘प्रोपेगेंडा’ बताते हुए खारिज कर दिया है।
ईरान ने पलटवार करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद करने की धमकी दी है जिससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में आग लग सकती है।
अकेला पड़ता अमेरिका? नाटो में दरार
दिलचस्प बात यह है कि इस जंग में अमेरिका को अपने पुराने साथियों का साथ नहीं मिल रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने इस हमले से दूरी बना ली है।
सहयोगियों के इस रुख से भड़के ट्रंप ने अब नाटो (NATO) से बाहर निकलने तक की चेतावनी दे दी है।
ऐसे में भारत का यह स्पष्टीकरण कि वह इस सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं था बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत के संबंध इजरायल और ईरान दोनों के साथ रणनीतिक रूप से अहम हैं।

