सरसों की नई किस्म देगी अधिक पैदावार, पूसा सरसों-30 से किसानों की बढ़ेगी पैदावार, जानिए इस किस्म की खाशियत

किसान भाइयों रबी का मौसम आते ही खेतों में सरसों की लहलहाती फसल हर किसी का मन मोह लेती है. पूसा सरसों-30 ने कम समय में ही किसानों के बीच अपनी खास जगह बना ली है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा विकसित यह किस्म न सिर्फ ज्यादा उपज देती है, बल्कि सेहतमंद तेल और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी जानी जाती है. कम पानी में भी शानदार प्रदर्शन करने वाली यह किस्म सूखा प्रभावित इलाकों के लिए वरदान है. बाजार में सरसों के अच्छे दाम मिल रहे हैं, तो यह किस्म किसानों की जेब भरने का सुनहरा मौका दे रही है.

पूसा सरसों-30 की खाशियत

यह किस्म 18.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है, जो आम सरसों किस्मों (12-15 क्विंटल) से कहीं ज्यादा है. 137 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल के पौधे 160-170 सेंटीमीटर लंबे और मजबूत होते हैं. इसके दाने चमकीले पीले, मोटे और 37.7% तेल की मात्रा वाले होते हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं. कम एरूसिक एसिड (LES-43) वाला तेल सेहत के लिए बेहतर है. यह किस्म एलिसिम (जंग) और अल्टरनेरिया (झुलसा) जैसे रोगों से भी बचाव करती है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान के किसानों के लिए यह सबसे उपयुक्त है.

बुआई का सही समय और तरीका

सही समय पर बुआई से पूसा सरसों-30 की उपज में 15-20% का इजाफा हो सकता है. उत्तर भारत में 15 अक्टूबर से 5 नवंबर तक बुआई आदर्श है. देर होने पर उपज घट सकती है. खेत को 3-4 बार जुताई कर भुरभुरा बनाएँ. प्रति हेक्टेयर 8-10 किलो ट्रुथफुल बीज काफी हैं. बीज को बोने से पहले थिराम या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें ताकि रोगों से बचा जा सके. पंक्तियों का अंतर 30 सेंटीमीटर और पौधों का अंतर 10-15 सेंटीमीटर रखें. गेहूँ या चना के साथ मिश्रित खेती भी की जा सकती है.

सरसों की पहली सिंचाई कब करनी चाहिए?

मिट्टी और खाद का सही प्रबंधन

यह किस्म दोमट मिट्टी (पीएच 7.0-8.0) में सबसे अच्छी होती है, लेकिन रेतीली मिट्टी में भी ठीक चलती है. जलभराव से बचें. बुआई से 15 दिन पहले 10-12 टन गोबर की खाद डालें. 60 किलो फॉस्फोरस और 40 किलो पोटाश बुआई के समय दें. 120 किलो नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बाँटकर डालें—बुआई, 30 दिन बाद और फूल आने पर. जैविक खेती के लिए गोमूत्र या वर्मी कम्पोस्ट का घोल डालें. 25-30 दिन बाद हल्की नीराई-गुड़ाई उपज को और बढ़ाती है.

पानी और देखभाल के आसान टिप्स

पूसा सरसों-30 कम पानी में भी अच्छी उपज देती है, जो इसे कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए आदर्श बनाती है. पहली सिंचाई 20-25 दिन बाद, दूसरी फूल आने पर और तीसरी दाने भरने पर करें. कुल 3-4 सिंचाई काफी हैं. ज्यादा पानी से जड़ सड़न का खतरा हो सकता है. कीटों से बचाव के लिए नीम तेल और रोगों के लिए मैनकोजेब का छिड़काव करें. सब्जी के लिए 45-50 दिन में कटाई करें, तेल के लिए 137 दिन तक इंतजार करें.

रोग और कीट प्रबंधन

यह किस्म रोग प्रतिरोधी है, लेकिन सावधानी जरूरी है. एलिसिम या अल्टरनेरिया दिखे तो बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें. एफिड्स या चाफर बीटल के लिए इमिडाक्लोप्रिड का हल्का घोल इस्तेमाल करें. जैविक खेती करने वाले नीम खली का उपयोग कर सकते हैं. खरपतवार के लिए 20 दिन बाद पेंडीमेथालिन का छिड़काव करें. ये तरीके फसल को स्वस्थ और हरा-भरा रखते हैं.

राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) से प्रमाणित

राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) पूसा सरसों-30 के सर्टिफाइड और ट्रुथफुल बीज उपलब्ध कराता है. ये बीज 90% से ज्यादा अंकुरण दर वाले और रोगमुक्त होते हैं. एनएससी का ऑनलाइन स्टोर myStore.in पर 1 किलो बीज सिर्फ 175 रुपये में उपलब्ध है. एनएससी किसानों को ट्रेनिंग और सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी भी देता है, जो इसे आत्मनिर्भर खेती का मजबूत साथी बनाता है.

कितनी कमाई होने वाली है प्रति हेक्टेयर

पूसा सरसों-30 से 18.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिलती है. बाजार में 5000-6000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से 80,000-1 लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है. तेल निकालने पर और कमाई बढ़ सकती है. राष्ट्रीय तिलहन मिशन के तहत बीज पर सब्सिडी भी मिलती है. सब्जी बाजार में भी इसकी अच्छी मांग है. पूसा सरसों-30 के साथ कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाएँ और खेतों को हरा-भरा रखें.

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Saloni Yadav

सलोनी यादव (Journalist): एक अनुभवी पत्रकार हैं जिन्होंने अपने 10 साल के करियर में कई अलग-अलग विषयों को बखूबी कवर किया है। उन्होंने कई बड़े प्रकाशनों के साथ काम किया है और अब NFL स्पाइस पर अपनी सेवाएँ दे रही हैं। सलोनी यादव हमेशा प्रामाणिक स्रोतों और अपने अनुभव के आधार पर जानकारी साझा करती हैं और पाठकों को सही और विश्वसनीय सलाह देती हैं। Contact Email: saloniyadav@nflspice.com Website: nflspice.com
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