Haryana News: राम रहीम को फिर मिली पैरोल, 2017 रेप केस में सजा काट रहे डेरा प्रमुख 16वीं बार आएंगे जेल से बाहर

Haryana News: रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर पैरोल मिली है। 2017 रेप केस में दोषी राम रहीम 16वीं बार जेल से बाहर आएंगे।
• अपडेटेड

Haryana News: हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh एक बार फिर पैरोल पर बाहर आने वाले हैं। रेप केस में सजा काट रहे राम रहीम को अगस्त 2017 के बाद यह 16वीं बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है।

जैसे ही पैरोल की खबर सामने आई, रोहतक और सिरसा में सुरक्षा बढ़ा दी गई। जेल परिसर के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

प्रशासन की तरफ से साफ किया गया है कि पैरोल के दौरान राम रहीम सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहेगा। हालांकि उसे बड़े स्तर पर समर्थकों की भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं दी गई है। फिर भी वह अपने अनुयायियों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर सकता है।

हर बार की तरह इस बार भी पैरोल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ डेरा समर्थकों में खुशी का माहौल है तो दूसरी तरफ विरोधी पक्ष लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है कि आखिर बार-बार पैरोल क्यों दी जा रही है।

जनवरी में भी लंबे समय तक जेल से बाहर रहा था

इस साल की शुरुआत में भी राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मिली थी। वह 5 जनवरी को जेल से बाहर आया था। इससे पहले अगस्त 2025 में जन्मदिन मनाने के लिए उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी।

बीते कुछ वर्षों में ऐसा शायद ही कोई साल रहा हो जब डेरा प्रमुख जेल से बाहर न आया हो। कभी पैरोल तो कभी फर्लो के जरिए उसे राहत मिलती रही है। कई बार वह उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित आश्रम में रहा जबकि हाल के मामलों में सिरसा डेरा उसका मुख्य ठिकाना बना।

राजनीतिक गलियारों में भी हर बार पैरोल के समय को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं। खासकर चुनावी माहौल के आसपास मिली राहत पर विपक्ष सवाल उठाता रहा है।

2017 की हिंसा आज भी लोगों के जेहन में ताजा

अगस्त 2017 में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने राम रहीम को अपनी दो शिष्याओं से रेप के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे 20 साल की सजा सुनाई थी और पीड़ित महिलाओं को जुर्माना राशि देने का आदेश भी दिया था।

फैसला आते ही पंचकूला और सिरसा में हालात बेकाबू हो गए थे। डेरा समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच जबरदस्त झड़प हुई थी। उस हिंसा में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और कई सरकारी इमारतों व वाहनों को नुकसान पहुंचा था।

उस दिन की तस्वीरें आज भी हरियाणा की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल मानी जाती हैं। फैसले के बाद राम रहीम को हेलीकॉप्टर के जरिए पंचकूला से रोहतक की सुनारिया जेल पहुंचाया गया था।

लगातार मिलती रही राहत, बढ़ता गया विवाद

राम रहीम पहली बार अक्टूबर 2020 में जेल से बाहर आया था। उसके बाद से पैरोल और फर्लो का सिलसिला लगातार जारी है। कभी बीमार मां से मिलने के लिए राहत मिली तो कभी नियमित पैरोल के नाम पर लंबे समय तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई।

हाल के वर्षों में उसकी पैरोल अवधि 20 दिन से लेकर 50 दिन तक रही है। यही वजह है कि अब हर नई पैरोल के साथ यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाता है।

कुछ मामलों में कोर्ट से मिली राहत

बीते महीनों में राम रहीम को कुछ बड़े मामलों में राहत भी मिली। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्या मामले में उसे बरी कर दिया था। वहीं डेरा के पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह हत्या मामले में भी अदालत ने जांच में कमियों का हवाला देते हुए उसे राहत दी।

हालांकि, दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में उसकी सजा अब भी बरकरार है और वही उसकी मौजूदा कैद का मुख्य आधार है।

अभी खत्म नहीं हुई कानूनी मुश्किलें

डेरा प्रमुख के खिलाफ अभी भी कई कानूनी मामले चल रहे हैं। इनमें अनुयायियों को कथित तौर पर नपुंसक बनाने का मामला भी शामिल है। राम रहीम इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

इसके अलावा 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आया था। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों में ट्रायल पर लगी रोक हटाई थी, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया फिर आगे बढ़ी।

हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेरा सच्चा सौदा का बड़ा जनाधार माना जाता है। यही वजह है कि जब भी राम रहीम जेल से बाहर आता है, उसका असर सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ जाती है।