Haryana Group D Biometric Verification: हरियाणा में 13 हजार ग्रुप-डी कर्मचारियों की दोबारा होगी जांच, बायोमेट्रिक मिलान का शेड्यूल जारी
हरियाणा सरकार ने विज्ञापन 01/2023 के तहत चयनित 13,246 ग्रुप-डी कर्मचारियों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का आदेश दिया है। 20 से 30 अप्रैल तक चलने वाली इस प्रक्रिया से भर्ती में पारदर्शिता आएगी और फर्जी उम्मीदवारों की पहचान हो सकेगी।
- बायोमेट्रिक की अनिवार्य डेडलाइन
- 13,246 कर्मियों का डाटा मिलान
- नोडल अधिकारियों की सीधी निगरानी
- मैच-मिसमैच की डेली रिपोर्टिंग
चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी नौकरी पा चुके ग्रुप-डी के हजारों कर्मचारियों के लिए आने वाले 10 दिन बेहद अहम होने वाले हैं। प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ‘मुन्नाभाइयों’ पर नकेल कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मानव संसाधन विभाग (HRD) ने विज्ञापन संख्या 01/2023 के तहत चयनित सभी 13,246 उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) का सख्त आदेश जारी कर दिया है।
20 अप्रैल से शुरू होगा ‘महारविवार’ जैसा अभियान
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया 20 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलेगी। प्रशासन ने इसके लिए 9 दिनों का एक टाइट शेड्यूल तैयार किया है।
इस दौरान न केवल विभागों में तैनात कर्मचारियों, बल्कि डिवीजन कार्यालयों में अटैच 853 कर्मियों का भी मिलान किया जाएगा। सरकार का मकसद साफ है—असली हकदार को नौकरी मिले और फर्जी तरीके से घुसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
कड़े पहरे में होगा मिलान, नोडल अधिकारियों की तैनाती
प्रक्रिया को फुलप्रूफ बनाने के लिए हर डिवीजन में विशेष ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किए जा रहे हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बायोमेट्रिक मशीनें और पर्याप्त स्टाफ हर हाल में उपलब्ध होना चाहिए।
चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने ‘मैच’ और ‘मिसमैच’ होने वाले केसों की अलग-अलग रिपोर्ट रोजाना आधार पर मांगी है। यानी अगर किसी का अंगूठा रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, तो उसकी रिपोर्ट उसी शाम मुख्यालय पहुंच जाएगी।
ग्राउंड रिपोर्टिंग: विभागों में हलचल तेज
इस आदेश के बाद सरकारी दफ्तरों में ग्रुप-डी कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभागों के प्रमुखों और उपायुक्तों (DC) को निर्देश दिए गए हैं कि वे बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के दौरान अनुपस्थित रहने वाले उम्मीदवारों का भी विस्तृत रिकॉर्ड रखें।
जानकारों का मानना है कि इस सख्ती से उन लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं जिन्होंने परीक्षा के दौरान किसी और को बैठाया था या सामाजिक-आर्थिक अंकों का गलत लाभ लिया था।



