रोहतक मर्डर मिस्ट्री: कार में GPS, 14 गोलियां और नहर में लाश; रंजिश की ऐसी खौफनाक पटकथा जिसे सुन रूह कांप जाए
रोहतक के चर्चित सत्यवान हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जीपीएस के जरिए लोकेशन ट्रैक कर 14 गोलियां बरसाकर की गई थी हत्या। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर शव बरामद कर लिया है। जानिए पुरानी रंजिश की पूरी कहानी।
रोहतक, हरियाणा: अपराध की दुनिया में जब ‘बदला’ हावी होता है, तो साजिशें किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं होतीं। हरियाणा के रोहतक में प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान की हत्या महज एक वारदात नहीं, बल्कि तकनीक और नफरत का एक जानलेवा कॉम्बिनेशन थी। चार दिनों की मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने मंगलवार सुबह जेएलएन नहर से सत्यवान का शव बरामद कर लिया है। लेकिन इस बरामदगी के साथ जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने इलाके में सनसनी फैला दी है।
कार में बिछाया गया था मौत का जाल
20 फरवरी को खरावड़ आउटर बाईपास पर जब पुलिस को एक लावारिस कार मिली, तो मंजर खौफनाक था। कार के शीशे चकनाचूर थे, अंदर-बाहर खून की बूंदें और जमीन पर पड़े 14 गोलियों के खोल चीख-चीख कर गवाही दे रहे थे कि यहाँ मौत का नंगा नाच हुआ है। मौके से मिली टूटी घड़ी और खून से लथपथ मोबाइल फोन ने किसी अनहोनी की पुष्टि पहले ही कर दी थी।
हाईटेक किलर: कार में लगाया था GPS
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वो थी आरोपियों की प्लानिंग। एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने जब सीसीटीवी खंगाले, तो होश उड़ गए। हत्या से ठीक एक दिन पहले यानी 19 फरवरी को आरोपी मनीष को सत्यवान की कार में जीपीएस डिवाइस लगाते देखा गया।
“आरोपी पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रहे थे। उन्हें पता था कि सत्यवान कब और कहाँ अकेला होगा। यह एक कोल्ड-ब्लडेड मर्डर था जिसे बेहद बारीकी से अंजाम दिया गया।” – पुलिस सूत्रों के अनुसार
दो गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियार बरामद
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए दो मुख्य किरदारों—भाली आनंदपुर निवासी मनीष और बापौड़ा के मंजीत उर्फ माफिया को दबोच लिया है। मनीष के पास से 5 देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए हैं। इनकी निशानदेही पर ही पुलिस नहर के उस हिस्से तक पहुँच सकी जहाँ शव को ठिकाने लगाया गया था।
रंजिश की जड़ें 6 साल पुरानी
इस कत्ल की पटकथा साल 2018 में लिखी गई थी। दरअसल, खेड़ी साध गांव के धर्मेंद्र की हत्या के मामले में सत्यवान को 20 साल की सजा हुई थी। हाल ही में वह हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बाहर आया था। दुश्मन इसी ताक में थे कि कब सत्यवान बाहर आए और वो अपना हिसाब बराबर करें। मृतक की मां ने धर्मेंद्र के परिजनों पर ही शक जताया था, जो अब सच साबित होता दिख रहा है।
सोशल मीडिया का ‘फेक’ खौफ
हत्या के बाद ‘काला राठी सुंदर राठी’ नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल से इस मर्डर की जिम्मेदारी ली गई थी, जिसमें लिखा था कि ‘शव भी नहीं देंगे’। हालांकि, पुलिस ने इस पोस्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि यह केवल दहशत फैलाने और जांच को भटकाने की एक कोशिश थी, जिसका असल हत्यारों से कोई सीधा लिंक नहीं मिला है।
सत्यवान के दोस्त जगबीर कहते हैं, “सत्यवान मिलनसार था, उसने अपनी सजा काट ली थी या कानून अपना काम कर रहा था, लेकिन इस तरह बेरहमी से शिकार करना न्याय नहीं है।” फिलहाल, पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।



