बिहार राज्य में जो लोग पशुपालन का काम करते है। उनके लिए राज्य सरकार काफी कम रु में पशुओ बीमा सुविधा दे रही है। जिसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। पशुपालन में कई तरह की बीमारियों के चलते पशु पालन करने वाले लोगो को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन इससे बचने के लिए पशुओ का बीमा करवाना जरुरी होता है। ताकि पशुपालन में किसी भी प्रकार की बीमारियों में पशुओ की मौत या अन्य प्रकार से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। बिहार राज्य में सरकार की तरफ से पशुओ के बीमा सुविधा पर सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है । जिससे मात्र 525 रु में ही पशुपालन करने वाले पशु का बीमा करवा सकते है।
किन पशुओ का होगा बीमा
पशुपालन में दुधारू पशुओ की काफी अहमियत होती है। और इनमे होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बीमा की सुविधा जरुरी होती है। बिहार राज्य सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अंतर्गत गव्य निदेशालय ने दुधारू पशुओ के लिए विशेष बीमा योजना को शुरू किया गया है। जिसमे पशुओ में बीमारियों से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव के लिए बीमा सुविधा मिल रही है। पशु के लिए इसमें अधिकतम 60 हजार रु तक की सुविधा दी जा रही है। जिसमे 525 रु का प्रीमियम पशुपालन करने वाले को भरना होगा। जबकि सरकार इस पर 1575 रु की सब्सिडी दे रही है।
कैसे कर सकते है पंजीकरण
दुधारू पशुओ के लिए बीमा की सुविधा ऑनलाइन https://misdairy.bihar.gov.in/Registration/Register के जरिये पूर्ण की जा सकती है। इसमें पंजीकरण करना होता है। जिसके लिए जरुरी जानकारी जैसे की नाम, पता, जन्म एवं जिले आदि की जानकारी देनी होती है। और फिर इसमें रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूर्ण करना होता है। इसमें फ़ोन नंबर, आधार कार्ड, गांव , पंचायत, ब्लॉक एवं जिले का नाम, माता पिता का नाम, आवेदन करने वाले का नाम, जन्म तिथि जैसी जानकारी मांगी गई है।
क्यों जरुरी है पशुओ के लिए बीमा
जो लोग बड़े लेवल पर डेयरी फार्मिंग का काम करते है या फिर ऐसे लोग जो 5 से 10 पशुओ के साथ पशुपालन का काम कर रहे है। जिनकी आजीविका का प्रमुख साधन दूध उत्पादन ही होता है। उनको पशुओ में होने वाली बीमारी के चलते पशु की मौत होने से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बीमा करवाना जरुरी होता है। बिहार राज्य में इस स्कीम में एक साल के लिए पशुओ का बीमा होता है। पशुओ का बीमा होने के बाद पशुपालन करने वाले लोगो को पशुओ की मौत के बाद भी आर्थिक नुकसान की संभावना कम हो जाती है। इन्शुरन्स राशि से नुकसान की भरपाई कर सकते है।