कपास की जबरदस्त उत्पादन देने वाली किस्मे, बम्पर उत्पादन के साथ साथ अच्छी रोगप्रतिरोधक

Vipin Yadav
Vipin Yadav - Author

रबी का सीजन लगभग खत्म हो चूका है। गेहू सरसो एवं अन्य फसलों की कटाई का कार्य पूर्ण हो चूका है। अभी किसान कपास की बुआई के लिए खेत की तैयारी कर रहे है। जबकि देश के कुछ हिस्सों में कपास की बुआई का कार्य शुरू भी हो चूका है। कपास की खेती के लिए फ़िलहाल जलवायु कुछ हिस्सों में अनुकूलित होने के चलते बुआई का कार्य जोरो पर है। अगर आप भी कपास की बुआई करने वाले है तो कपास की अच्छी वैरायटी आपके लिए महत्वपूर्ण होने वाली है । ताकि समय समय पर कपास में लगने वाले रोगो से छुटकारा भी मिले एवं अधिक उत्पादन भी मिले।

बेहतर वैरायटी का चयन कैसे होता है।

देश में अलग अलग राज्यों में वातावरण अलग होता है। तापमान, उपजाऊपन आदि हर जगह पर अलग अलग होता है। तो किसानो को उस स्थान की जलवायु, एवं खेती को प्रभावित करने वाले कारको के अनुकूलित ही फसल की वैरायटी का चुनाव करना होता है। और ये जरुरी भी है। अधिक उत्पादन तभी ले सकते है। जब वैरायटी को अनुकूलित वातावरण मिले। कपास देश में अलग अलग हिस्सों में बोई जाती है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा सहित अन्य कई राज्यों में कपास की जाती है। इसके लिए अलग अलग वैरायटी भी आ चुकी फ़िलहाल कई ऐसी किस्मे है जो बम्पर उत्पादन एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता के आ रही है।

कपास की टॉप वैरायटी

कपास की वैरायटी अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग होती है। जरुरी नहीं है की एक क्षेत्र में एक किस्म अच्छा उत्पादन दे रही है वो किसी अन्य क्षेत्र में भी अच्छा उत्पादन देगी। वातावरण अनुकूल होगा तब ही उत्पादन मिलता है। ऐसे में क्षेत्र के हिसाब से वैरायटी का चयन करे। अच्छे उत्पादन के लिए जो किस्मे है उसकी जानकारी निचे दी गई है।

  • सुपरकॉट वैरायटी -: कपास की ये वैरायटी काफी बेहतर मानी जाती है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक होती है। खासकर कपास में लगने वाले कीड़े जैसी की चूषक आदि के प्रति काफी सहिष्णु होती है। सिंचित एवं असिंचित दोनों ही क्षेत्रों में इसकी बुआई की जा सकती है। ये 160 से 170 दिन का समय में तैयार हो जाती है।
  • HS 6 वैरायटी – ये वैरायटी हरियाणा राज्य में खासकर अगेती बिजाई के लिए है। इसके पकाव की अवधि लगभग 180 से 185 दिनों की होती है। इसकी औसत उपज प्रति एकड़ 8 से 9 क्विंटल के लगभग होती है । इसमें 36 फीसदी रुई की मात्रा होती है। इसमें गुलाबी सुंडी का प्रकोप कम होता है।
  • H117 वैरायटी – ये भी एक अगेती बुआई की किस्म है। हरियाणा राज्य के लिए ये वैरायटी काफी उपयुक्त है। इसमें छोटे छोटे पत्ते होते है। टिंडे मध्यम आकार के होते है। जबकि इसमें मरोड़ रोक के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता होती है। इसकी प्रति एकड़ अधिकतम उत्पादन 15 क्विंटल तक लिया जा सकता है।

Note – यहाँ पर केवल जानकारी दी गई है। किसी भी प्रकार के प्रयोग से पहले सम्बंधित एक्सपर्ट से सलाह जरूर ले।

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विपिन यादव पिछले 5 सालों से न्यूज़ कंटेंट लेखन कार्य से जुड़ा हुआ है। nflspice.com के साथ में अप्रैल 2023 से इनकी यात्रा शुरू हुई है और लगातार अपनी न्यूज़ लेखन का कार्य आप सबसे के लिए कर रहे हैं। इन्होने बिज़नेस, कृषि, ऑटो और गैजेट बीट में काफी अनुभव प्राप्त किया है जिसको अब ये आपके साथ में शेयर करते हैं। इसके अलावा मंडियों से आने वाले रोजाना के भावों पर भी इनकी पकड़ काफी अच्छी है।