Haryana News: हरियाणा के श्रम विभाग में हुए करीब 1500 करोड़ रुपये के संभावित वर्क स्लिप घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट पेश नहीं हो सकी है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा गठित पंकज अग्रवाल कमेटी को 31 मार्च तक अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन अफसरों की व्यस्तता के कारण अब इसमें 15 दिन की देरी और हो सकती है।
1 अप्रैल को होने वाली महत्वपूर्ण मीटिंग को टालकर अब 3 अप्रैल के लिए तय किया गया है।
बजट और बैठकों ने रोकी जांच की रफ्तार
कमेटी के चेयरमैन वरिष्ठ IAS पंकज अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने बजट सत्र और अन्य सरकारी बैठकों के कारण जांच प्रक्रिया उतनी तेज नहीं हो पाई जितनी उम्मीद थी। हालांकि अब जांच को फास्ट ट्रैक पर डाल दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मामले की तह तक जाने के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसमें IAS राजीव रतन और IPS पंकज नैन जैसे कड़क अफसर शामिल हैं।
आंकड़ों ने उड़ाए होश: 90% से ज्यादा वर्क स्लिप फर्जी!
श्रम मंत्री अनिल विज के खुलासे के बाद जब 13 जिलों में शुरुआती जांच हुई तो जो आंकड़े सामने आए वो चौंकाने वाले थे:
कुल वर्क स्लिप: 5,99,758 जारी की गईं।
सही पाई गईं: मात्र 53,249।
फर्जीवाड़ा: 5,46,509 वर्क स्लिप गलत निकलीं।
मजदूरों का खेल: 2.21 लाख पंजीकृत मजदूरों में से 1.93 लाख के नाम फर्जी पाए गए।
जांच में पता चला है कि कई गांवों में तो पूरे के पूरे कुनबे ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करवा लिया था, ताकि सरकारी योजनाओं का पैसा डकारा जा सके।
विज की सख्ती: अब सभी 22 जिलों पर नजर
शुरुआत में यह घोटाला हिसार, कैथल, जींद, सिरसा और फरीदाबाद जैसे जिलों तक सीमित लग रहा था लेकिन इसकी गंभीरता देखते हुए सीएम सैनी ने अब प्रदेश के सभी जिलों से रिपोर्ट तलब की है।
सभी जिलों के डीसी (DC) को नई रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
कमेटी न सिर्फ दोषियों की पहचान करेगी बल्कि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए डिजिटल फिल्टर और सुधारात्मक कदमों की सिफारिश भी करेगी।

