Chhatrapati Murder Case: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। शनिवार को कोर्ट ने साल 2002 के चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में राम रहीम को मिले आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले के अन्य तीन दोषियों की सजा को बरकरार रखा है।
चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनाया फैसला
यह अहम फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया। गौरतलब है कि इससे पहले पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में राम रहीम को इस हत्या का मास्टरमाइंड मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
डेरा प्रमुख ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर लंबी बहस के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या था पूरा मामला?
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, जो ‘पूरा सच’ अखबार के संपादक थे, की साल 2002 में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण से जुड़ी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की थीं जिससे नाराज होकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2019 में सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम सहित कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को दोषी करार दिया था।
बेटे अंशुल छत्रपति की नाराजगी
हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा – यह फैसला बेहद निराशाजनक है। सीबीआई कोर्ट ने सबूतों के आधार पर दूध का दूध और पानी का पानी किया था लेकिन हाई कोर्ट ने मुख्य आरोपी को बरी कर दिया जबकि अन्य की सजा बरकरार रखी।
अंशुल ने साफ किया कि वह हार नहीं मानेंगे और इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीआई भी इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी।
बाकी तीन की मुश्किलें बरकरार
भले ही राम रहीम को इस मामले में राहत मिल गई हो लेकिन केस से जुड़े अन्य तीन दोषियों के लिए हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं आई है। उनकी उम्रकैद की सजा को अदालत ने सही माना है।
वहीं राम रहीम फिलहाल साध्वी यौन शोषण और अन्य मामलों में सजा काट रहे हैं इसलिए इस फैसले के बावजूद उनकी जेल से रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।

