Haryana News: पिछले सीजन में धान की घोस्ट खरीद (फर्जी खरीद) और करोड़ों के घोटाले से सबक लेते हुए हरियाणा सरकार अब रबी सीजन को लेकर सुपर अलर्ट मोड पर है। इस बार गेहूं की सरकारी खरीद में सेंधमारी रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है इसलिए नियमों को इतना सख्त कर दिया गया है कि अब बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर-ट्रॉली को मंडी के गेट से अंदर घुसने भी नहीं दिया जाएगा।
नंबर प्लेट की फोटो और बायोमेट्रिक मस्ट
आपको बता दें कि नए सिस्टम के तहत मंडी के गेट पर ही अनाज ढोने वाले वाहन की नंबर प्लेट की फोटो खींची जाएगी तभी एंट्री पास जारी होगा। सिर्फ इतना ही नहीं मंडी के अंदर फसल की नीलामी से पहले किसानों को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (अंगूठा लगाना) से गुजरना होगा।
अगर किसान खुद नहीं आ सकता तो उसे तीन लोगों को नॉमिनेट करना होगा। सरकार का मकसद साफ है कि अब कागजों पर होने वाली फर्जी आवक को जड़ से खत्म करना।
जीपीएस और जियो-फेंसिंग का पहरा
हरियाणा सरकार की ओर से भ्रष्टाचार रोकने के लिए अब ट्रांसपोर्टरों पर भी डिजिटल लगाम कसी गई है। एग्जिट गेट पास तभी मिलेगा जब वाहन का जीपीएस चालू होगा।
सरकार जियो-फेंसिंग तकनीक पर भी विचार कर रही है जिससे यह ट्रैक किया जा सके कि अनाज लेकर निकला ट्रक वास्तव में गोदाम तक पहुंचा या रास्ते में ही गायब हो गया।
अधिकारियों और खरीद निरीक्षकों को इस नए डिजिटल सिस्टम की ट्रेनिंग देने का काम आज से शुरू हो रहा है।
क्यों पड़ी इतने सख्त नियमों की जरूरत?
आपको बता दें कि पिछले दिनों धान खरीद के दौरान करनाल समेत कई जिलों में बड़ा घोटाला सामने आया था। बिचौलियों और राइस मिलर्स ने दूसरे राज्यों (जैसे यूपी) से सस्ता धान मंगाकर उसे हरियाणा के किसानों के नाम पर एमएसपी (MSP) पर ठिकाने लगा दिया।
अकेले करनाल में ही इस मामले में 6 एफआईआर दर्ज हुईं और 25 से ज्यादा अधिकारी व आढ़ती सलाखों के पीछे पहुंचे। इसी प्रॉक्सी खरीद के खेल को खत्म करने के लिए इस बार गेहूं खरीद को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाया गया है।

