Haryana News: हरियाणा के करनाल जिले से भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे की बंदरबांट के खिलाफ एक बहुत बड़ी और कड़ा संदेश देने वाली खबर सामने आई है।
पंचायती राज विभाग की ओर से करीब 34 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाई जा रही जिला परिषद की नई बिल्डिंग में गंभीर अनियमितताएं और बेहद घटिया स्तर का निर्माण कार्य पाए जाने पर सरकार ने सख्त एक्शन लिया है।
मामले की गूंज सीधे चंडीगढ़ तक पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर विभाग ने दो अधिशासी अभियंताओं (XEN) परमिंद्र और नारायण दत्त को तुरंत प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
करोड़ों की लागत से बनने वाली इस इमारत का ढांचा तैयार होते ही भ्रष्टाचार की वजह से दरकने लगा था जिसे देखकर हर कोई हैरान है।
जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से बन रही इस इमारत में जिस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा था उस पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि विकास कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लेंटर से उखड़ी सीमेंट, दिखने लगा सरिया
इस बड़ी धांधली का खुलासा तब हुआ जब पंचायती राज विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग (गुणवत्ता नियंत्रण शाखा) की उच्च स्तरीय टीम औचक निरीक्षण के लिए करनाल पहुंची।
अधिकारियों ने जब मौके पर जाकर निर्माण कार्य की बारीकियों को देखा तो वहां का नजारा बेहद डरावना और चौंकाने वाला था।
बिल्डिंग के पिलरों और छतों (लेंटर) से सीमेंट इस कदर उखड़ कर गिर रही थी कि भीतर डाले गए लोहे के सरिए साफ तौर पर बाहर दिखाई दे रहे थे।
यह साफ इशारा था कि इमारत को खड़ा करने में बेहद घटिया दर्जे की सीमेंट, रेत और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।
जब क्वालिटी कंट्रोल की टीम ने मौके पर मौजूद ठेकेदार और निर्माण एजेंसी संजय कंस्ट्रक्शन कंपनी के नुमाइंदों से कड़े सवाल पूछे तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कंपनी की यह चुप्पी भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुहर लगाने के लिए काफी थी।
चीफ इंजीनियर की फटकार, जेई और एसडीओ भी रडार पर
जैसे ही इस महाघोटाले की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची वैसे ही दोनों जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिर गई।
इस कड़े एक्शन के तुरंत बाद पंचायती राज विभाग के चीफ इंजीनियर ने खुद करनाल का दौरा किया। उन्होंने मौके की भयावह स्थिति को देखकर स्थानीय अधिकारियों की क्लास लगाई और उन्हें जमकर फटकार लगाई।
चीफ इंजीनियर ने पूरे मामले की गहराई से परतों को खोलने के लिए एक विशेष उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी अब निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित करेगी:
निर्माण एजेंसी की भूमिका: संजय कंस्ट्रक्शन कंपनी ने नियमों का कितना उल्लंघन किया और घटिया सामग्री कहां से आई।
अधिकारियों की मिलीभगत: निर्माण कार्य के दौरान मौके पर तैनात रहे जूनियर इंजीनियर (JE), सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) और अन्य तकनीकी अधिकारियों की इस लापरवाही में क्या भूमिका थी।
सख्त कानूनी कार्रवाई: जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर न केवल ठेका कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
इस बड़ी कार्रवाई से पूरे करनाल प्रशासन और पीडब्ल्यूडी व पंचायती राज महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
आम जनता भी इस फैसले की सराहना कर रही है कि समय रहते इस घटिया निर्माण को पकड़ लिया गया वरना भविष्य में यह सरकारी बिल्डिंग किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती थी।


