Rewari News: प्राकृतिक खेती को मिला नया मंच, रेवाड़ी में किसानों और युवा प्रतिभाओं को एक साथ जोड़ा गया
रेवाड़ी में प्राकृतिक खेती पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां किसानों को जैविक तकनीकों की जानकारी दी गई और प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
रेवाड़ी में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम ने खेती और युवा विकास को एक ही मंच पर लाकर नई चर्चा शुरू कर दी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, मॉडल टाउन रेवाड़ी में हुए प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में किसानों को खेती के टिकाऊ मॉडल से जोड़ने के साथ-साथ युवा प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।
यह आयोजन केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हरियाणा सरकार द्वारा चलाए जा रहे जन-जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था। कार्यक्रम का संचालन अरावली किसान क्लब की ओर से किया गया, जिसमें क्षेत्र के किसान, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्राकृतिक खेती को भविष्य की जरूरत बताया
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे एसडीएम बावल संजीव कुमार ने अरावली किसान क्लब की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि खेती, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों को एक साथ जोड़ने का प्रयास समाज के लिए सकारात्मक दिशा तय करता है। उन्होंने पौधारोपण, पशु-पक्षी संरक्षण और प्राकृतिक कृषि से जुड़े अभियानों को ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युवाओं की भागीदारी प्राकृतिक खेती को और मजबूत बना सकती है। साथ ही सम्मानित प्रतिभाओं को बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
किसानों को दी गई प्राकृतिक कृषि की व्यवहारिक जानकारी
अरावली किसान क्लब के प्रधान यशपाल खोला कंवाली ने किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत और प्राकृतिक कीट प्रबंधन जैसे उपायों की जानकारी साझा की, जिन्हें कम लागत वाली खेती के प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को यह भी बताया गया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के दौरान किन सावधानियों का पालन करना चाहिए, ताकि उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाया जा सके।
खेती से आगे बढ़कर गांवों के विकास का मॉडल
यशपाल खोला ने कहा कि प्राकृतिक कृषि केवल फसल उत्पादन की तकनीक नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार यदि किसान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ खेती करें तो आने वाले वर्षों में कृषि की लागत कम करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कई गांवों तक पहुंचा जागरूकता अभियान
रेवाड़ी जिले में यह पहल केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रही। मनेठी, परखोतमपुर, बालावास, नंगली परसापुर, दुल्हेड़ा खुर्द और सुर्खपुर सहित कई गांवों में भी इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना रहा।
विशेष बात यह रही कि यहां प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण को युवा प्रतिभाओं के सम्मान से जोड़ा गया, जिससे कृषि को नई पीढ़ी के साथ जोड़ने का संदेश भी गया। यदि ऐसे प्रयास गांव स्तर पर लगातार जारी रहते हैं तो प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं बल्कि ग्रामीण विकास की मजबूत रणनीति बन सकती है।
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