हरियाणा में 150 करोड़ का महाघोटाला! कोटक महिंद्रा बैंक की 109 शाखाएं की गई थीं सील, बॉम्बे हाईकोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, जानें अंदर की पूरी कहानी
Haryana News: पंचकूला नगर निगम के 150 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में बॉम्बे हाईकोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। कोटक महिंद्रा बैंक ने दावा किया है कि हरियाणा पुलिस ने उसकी 109 शाखाएं सील कर दी थीं, जिन्हें 127 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद ही खोला गया।
चंडीगढ़/मुंबई: हरियाणा के सबसे चर्चित और बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक पंचकूला नगर निगम 150 करोड़ रुपये घोटाला में एक ऐसा सनसनीखेज मोड़ आया है जिसने देश के बैंकिंग और प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है।
कोटक महिंद्रा बैंक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि हरियाणा पुलिस ने मार्च के महीने में राज्यभर में बैंक की सभी 109 शाखाओं (Branches) को पूरी तरह सील कर दिया था।
बैंक के मुताबिक यह कार्रवाई इतनी गुप्त और सख्त थी कि जब बैंक ने पंचकूला नगर निगम के खाते में अस्थायी रूप से 127.27 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए उसके बाद ही इन शाखाओं के ताले खोले गए।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान फिलहाल राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) के हाथों में है। घोटाले का मुख्य सूत्रधार कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला सेक्टर-11 शाखा का तत्कालीन मैनेजर पुष्पेंद्र सिंह है।
"हरियाणा में हमारे करीब 14 लाख ग्राहक हैं और 24 हजार करोड़ रुपये की जमा पूंजी है। बिना किसी एफआईआर के एक झटके में 109 शाखाओं को सील कर देना बैंकिंग व्यवस्था पर सीधा हमला था, जिससे भारी वित्तीय नुकसान हुआ।" — जनक द्वारकादास, वरिष्ठ अधिवक्ता (कोटक महिंद्रा बैंक)
अदालत में बैंक ने खुलासा किया कि जब मामला पूरी तरह फंस गया तब मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद बीच का रास्ता निकाला गया। बैंक ने मिलान प्रक्रिया पूरी होने तक 127.27 करोड़ रुपये तो जमा करा दिए लेकिन यह भी साफ कर दिया कि यह कोई अंतिम भुगतान या गलती की स्वीकारोक्ति नहीं है।
विजिलेंस (SV&ACB) की एफआईआर के मुताबिक, यह पूरा खेल साल 2018 से चल रहा था। पंचकूला नगर निगम ने बैंक में करीब 145 करोड़ रुपये की 16 फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई थीं जो मैच्योरिटी पर 158 करोड़ होनी थीं।
आरोप है कि बैंक मैनेजर पुष्पेंद्र सिंह ने निगम के सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर फर्जी खाते खोले और असली एफडी का पैसा उन खातों में ट्रांसफर कर ठिकाने लगा दिया।
ट्विस्ट यह है कि नगर निगम जहां ओरिजिनल दस्तावेजों के आधार पर 158 करोड़ मांग रहा है वहीं बैंक का कहना है कि 16 में से 14 एफडी तो 2024 में समय से पहले (Premature) ही भुनाई जा चुकी हैं।
इस गंभीर विसंगति को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर की पीठ ने बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया दस्तावेजों में अंतर पाते हुए पंचकूला नगर निगम द्वारा इस रकम के इस्तेमाल या ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक लगा दी है। कोर्ट से बैंक को अंतरिम राहत मिलना इस घोटाले की जांच में एक नया मोड़ माना जा रहा है।
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