8th Pay Commission: देश के करीब 50 लाख से अधिक सक्रिय केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) की समीक्षा प्रक्रिया अब अपने अगले चरण में पहुंच चुकी है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के विभिन्न संगठनों से सुझाव और मेमोरेंडम (Memoranda) प्राप्त करने के लिए आयोग ने आधिकारिक पोर्टल (8cpc.gov.in) पर अंतिम तारीख को बढ़ाकर 15 जून कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में काम कर रहा यह आयोग इस समय जिस सबसे बड़े और पेचीदा सवाल पर माथापच्ची कर रहा है वह है फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor)। यही वह जादुई गणितीय फॉर्मूला है जो तय करेगा कि आने वाले दिनों में कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और बुजुर्गों की पेंशन में कितनी भारी बढ़ोतरी होने वाली है।
क्या है फिटमेंट फैक्टर और क्यों इस पर टिकी हैं सबकी नजरें?
सरल शब्दों में कहें तो फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर (गुणांक) है जिसके जरिए वर्तमान बेसिक सैलरी को नए वेतनमान (Pay Matrix) में बदला जाता है।
उदाहरण के लिए 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसके चलते उस वक्त कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर सीधे ₹18,000 हो गई थी।
अब 8वें वेतन आयोग के सामने अलग-अलग कर्मचारी यूनियनों और एक्सपर्ट्स ने अपनी-अपनी मांगें और अनुमान रखे हैं जिसके चलते न्यूनतम सैलरी को लेकर कई तरह के समीकरण बन रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने अभी तक किसी एक आंकड़े पर मुहर नहीं लगाई है।
न्यूनतम सैलरी का गणित: ₹34,560 से लेकर ₹68,940 तक के कयास
कर्मचारी संगठनों और वित्तीय विश्लेषकों की तरफ से आयोग को भेजे गए प्रस्तावों के आधार पर सैलरी बढ़ोतरी के ये मुख्य परिदृश्य (Scenarios) सामने आ रहे हैं:
| प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर | किसके द्वारा मांग/अनुमान | संभावित न्यूनतम बेसिक पे | वर्तमान बेसिक (₹18,000) से बढ़ोतरी |
| 1.92 | वित्तीय विश्लेषक (रूढ़िवादी अनुमान) | ₹34,560 | 92 प्रतिशत |
| 2.57 | 7वें वेतन आयोग का बेंचमार्क | ₹46,260 | 157 प्रतिशत |
| 3.00 | ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) | ₹54,000 | 200 प्रतिशत |
| 3.25 | नेशनल पेंशनर्स ऑर्गेनाइजेशन (NPO) | ₹58,500 | 225 प्रतिशत |
| 3.83 | जेसीएम नेशनल काउंसिल (सर्वोच्च मांग) | ₹68,940 | 283 प्रतिशत |
नोट: बेसिक पे में होने वाले इस बदलाव के साथ ही महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) को भी नए सिरे से रीसेट किया जाएगा। वर्तमान प्रक्रिया के तहत मौजूदा डीए को मूल वेतन में मर्ज करके नए सिरे से गणना शुरू होगी।
कब तक लागू होंगी सिफारिशें और एरियर (Arrears) का क्या है नियम?
आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि वेतन आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें 2027 के मध्य तक सरकार को सौंप देगा।
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते संशोधित वेतन असल में कर्मचारियों के बैंक खातों में 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में आ सकता है।
लेकिन यहां कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। नए वेतनमान की प्रभावी तारीख (Reference Date) 1 जनवरी, 2026 ही तय की गई है।
इसका मतलब यह है कि भले ही नया वेतन मिलने में देरी हो लेकिन जनवरी 2026 से लेकर लागू होने के दिन तक का पूरा बकाया (Arrears) कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकमुश्त लंप-सम (Lump-sum) भुगतान के रूप में दिया जाएगा।

