कार्यस्थल पर पसीना बहाने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता के नियमों को और अधिक सुदृढ़ किया है। अब ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना में अपंगता (Disability) होने या दुखद मृत्यु होने पर सरकार की ओर से लाखों रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाएगी। हालांकि, इस लाभ को पाने के लिए श्रमिकों का ‘बोर्ड’ में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
हादसे में मदद का पूरा गणित
अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई पंजीकृत श्रमिक कार्यस्थल पर किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है और उसमें वह अपंग हो जाता है, तो उसे 1.5 लाख रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। वहीं, यदि दुर्घटना में श्रमिक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को संबल प्रदान करने के लिए 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
घर का सपना होगा पूरा, मिलेगा ब्याज मुक्त ऋण
श्रमिकों के लिए सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उनके घर के सपने को लेकर भी बड़ी घोषणा की गई है। सरकार मकान की खरीद या निर्माण के लिए श्रमिकों को 2 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-Free Loan) प्रदान कर रही है। इसके साथ ही, ‘मुख्यमंत्री पंजीकरण प्रोत्साहन योजना’ के तहत पंजीकृत होने वाले श्रमिकों को 1,100 रुपये की राशि भी दी जाती है।
कैसे कराएं पंजीकरण? ये है जरूरी शर्त
इन सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ केवल उन्हीं कामगारों को मिलेगा जो श्रमिक बोर्ड में पंजीकृत होंगे। पंजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक अनिवार्य शर्त रखी है:
- 90 दिन का अनुभव: पंजीकरण के लिए श्रमिक का कम से कम 90 दिनों तक कार्य करने का सत्यापन (Verification) होना जरूरी है।
- सत्यापन प्रक्रिया: संबंधित विभाग द्वारा कार्य की पुष्टि होने के बाद ही श्रमिक का बोर्ड में पंजीकरण किया जाता है।
प्रशासन ने सभी कामगारों से अपील की है कि वे अपना पंजीकरण जल्द से जल्द पूरा कराएं ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में उनके परिवार को सरकारी योजनाओं का कवच मिल सके।

