चंडीगढ़: विदेश जाकर डॉलर कमाने का सपना जब किसी हादसे या मौत में बदल जाता है, तो पीछे छूटे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है।
अक्सर आर्थिक तंगी के कारण परिवार अपने लाडले का पार्थिव शरीर तक भारत नहीं ला पाते। ऐसे संकटपूर्ण समय में हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने मददगार की भूमिका निभाते हुए विशेष रिलीफ फंड से सहायता की मुहिम शुरू की है।
3 साल में 150 युवाओं ने गंवाई जान, 39 मौतें इसी साल
आंकड़े डराने वाले हैं। पिछले 2.5 से 3 साल के भीतर हरियाणा के लगभग 150 युवाओं की विदेशी धरती पर मौत हो चुकी है। इसमें अकेले पिछले एक साल में 39 युवाओं की जान गई है।
मौत के कारणों में डंकी रूट के खतरनाक रास्ते, सड़क दुर्घटनाएं, भयंकर बीमारियां, पानी में डूबना और लूटपाट के दौरान हत्या जैसे मामले शामिल हैं।
कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला और कैथल जैसे जिलों में विदेश जाने का क्रेज सबसे ज्यादा है और यहीं के परिवार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
कल्याण कोष: शव लाने से लेकर आर्थिक मदद तक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रिलीफ फंड से पीड़ित परिवारों को 5 से 7 लाख रुपये तक की मदद दी है। सरकार ने इसके लिए एक समर्पित कल्याण कोष बनाया है। जो परिवार शव लाने का खर्च उठाने में असमर्थ हैं या जिनके मुखिया की विदेश में मृत्यु हो गई है वे सरकार को लिखित आवेदन देकर इस कोष से मदद ले सकते हैं।
सिर्फ पैसा नहीं, ट्रेनिंग भी दे रही सरकार
सरकार ने अब युवाओं को मौत के रास्ते (डंकी मार्ग) से बचाने के लिए नई रणनीति अपनाई है:
विशेष प्रशिक्षण: युवाओं को विदेश जाने से पहले 2 दिन की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें वहां के नियम-कानून और ‘क्या करें, क्या न करें’ सिखाया जा रहा है।
भाषा का ज्ञान: इजराइल, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में जाने वाले युवाओं को वहां की स्थानीय भाषा सिखाई जा रही है।
सुरक्षित रोजगार: फॉरेन कॉर्पोरेशन और HKRN के माध्यम से अब तक करीब 250 युवाओं को इजराइल और दुबई जैसे देशों में उनके हुनर के हिसाब से सुरक्षित रोजगार दिलाया गया है।
जागरूकता अभियान: डंकी रूट को कहें ना
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार (कमान, फॉरेन कॉर्पोरेशन) के नेतृत्व में अब तक 26 जागरूकता बैठकें की जा चुकी हैं।
सरकार का लक्ष्य जिला और ग्रामीण स्तर पर युवाओं को यह समझाना है कि वे गलत एजेंटों के चक्कर में पड़कर अपनी जान जोखिम में न डालें।
सरकार अब उन देशों की जानकारी भी दे रही है जहां रोजगार के अच्छे अवसर हैं लेकिन युवाओं को उनके बारे में पता नहीं है।

