किसानों के लिए खुशखबरी! पश्चिम एशिया संकट के बीच खरीफ सीजन के लिए खाद का बंपर स्टॉक, सरकार ने किया बड़ा दावा

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद देश में खरीफ सीजन के लिए खाद की कोई कमी नहीं होगी। उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, जरूरत का 51% से ज्यादा स्टॉक पहले से मौजूद है। जैविक खाद की मांग में भी भारी उछाल आया है, जिससे सरकार को बड़ी राहत मिली है।

Written By NFLSpice News Desk
Jun 08, 2026 • 22:44

India Fertilizer Stock Position Comfortable for Kharif 2026: देश के अन्नदाताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बावजूद भारत में इस बार खरीफ सीजन के लिए खाद (उर्वरक) की कोई किल्लत नहीं होने वाली है। केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय ने सोमवार को देश में खाद की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण और आश्वस्त करने वाला अपडेट जारी किया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खरीफ 2026 सीजन के लिए देश में कुल 383.9 लाख मीट्रिक टन (LMT) खाद की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। इस मांग के मुकाबले आज की तारीख में सरकार के पास 197.56 लाख मीट्रिक टन खाद का स्टॉक पहले से ही मौजूद है।

यह आंकड़ा कुल जरूरत का 51 प्रतिशत से भी ज्यादा है। अमूमन साल के इस समय तक केवल 33 प्रतिशत स्टॉक ही जमा हो पाता था लेकिन सरकार की एडवांस प्लानिंग और बेहतर लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट के कारण इस बार बंपर स्टॉक उपलब्ध है।

केमिकल छोड़कर ऑर्गेनिक की तरफ बढ़े किसान, मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

इस बार के आंकड़ों में एक बेहद खूबसूरत और पर्यावरण के अनुकूल बदलाव भी देखने को मिला है। ईरान युद्ध और वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय किसानों का रुझान अब रासायनिक खादों से हटकर जैविक खाद (Organic Manure) की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

"इस सीजन में अब तक किसानों ने 11.17 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद की खरीदारी की है, जो पिछले साल इसी अवधि में महज 3.20 लाख मीट्रिक टन थी। यह तीन गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी है।" — उर्वरक मंत्रालय का बयान

जैविक खाद अपनाने में ये राज्य रहे सबसे आगे:

जून में समंदर के रास्ते आएगी 25 LMT खाद, बजट की कोई कमी नहीं

मंत्रालय ने साफ किया है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से अब तक घरेलू उत्पादन और आयात के जरिए देश में 147.40 लाख मीट्रिक टन खाद की अतिरिक्त व्यवस्था की जा चुकी है।

अकेले जून के महीने में भारतीय बंदरगाहों पर 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) पहुंचने की उम्मीद है।

इसके अलावा सरकार ने 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद के लिए एक और वैश्विक टेंडर जारी किया है।

किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए विभाग लगातार इनपुट्स की समीक्षा कर रहा है। खाद कंपनियों के सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान हर हफ्ते (Weekly Basis) किया जा रहा है और सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त बजट मौजूद है।

कुल मिलाकर इस बार मानूसन की बौछारों के बीच किसानों की खेती बिना किसी रुकावट के फलने-फूलने के लिए तैयार है।

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