PM Ujjwala Yojana: उज्ज्वला योजना में सरकार ने आधी से ज्यादा घटाई सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या, अब मिलेंगे सिर्फ इतने
PM Ujjwala Yojana: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए सालाना सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर सिर्फ 4 कर दी है। पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती लागत के बीच सरकार ने यह फैसला लिया है। जानें अब कितना जेब पर पड़ेगा असर।
PM Ujjwala Yojana: लोकसभा चुनाव के ठीक बाद देश के करोड़ों गरीब परिवारों की रसोई पर महंगाई का एक नया बोझ आ पड़ा है। केंद्र सरकार ने अपनी सबसे महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को मिलने वाले कोटे पर तगड़ी कैंची चला दी है। नए आदेश के मुताबिक अब उज्ज्वला लाभार्थियों को एक वित्त वर्ष में 9 सिलेंडरों के बजाय केवल 4 सिलेंडरों पर ही ₹300 की सरकारी सब्सिडी मिलेगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब ठीक एक दिन पहले यानी 7 जून को ही घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) सिलेंडर के दाम में ₹29 की बढ़ोतरी की गई थी जिसके बाद दिल्ली में गैस सिलेंडर की कीमत ₹942 तक पहुंच चुकी है।
क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार ने रखी अपनी बात
सोमवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण माल खानुजा ने इस कटौती की पुष्टि की। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब उनसे इस झटके के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसके पीछे 'औसत खपत' का तर्क दिया।
"नया कोटा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के वास्तविक सालाना उपभोग पैटर्न (Average Consumption) को देखकर तय किया गया है। औसतन एक गरीब परिवार साल में करीब चार ही सिलेंडर रिफिल करवाता है इसलिए सब्सिडी के दायरे को उसी हिसाब से सीमित किया गया है।" — प्रवीण माल खानुजा, अतिरिक्त सचिव
हालांकि, असल कहानी वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल से भी जुड़ी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की लागत आसमान छू रही है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है जो सीधे तौर पर 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' (ग्लोबल बेंचमार्क) से तय होता है। यह बेंचमार्क फरवरी से अब तक 46% तक बढ़ चुका है।
12 से सीधे 4 पर आया आंकड़ा, जानें अब कितना लगेगा पैसा
साल 2016 में जब इस योजना की शुरुआत हुई थी तब महिलाओं को सालाना 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे। पिछले साल इसे घटाकर 9 किया गया और अब साल 2026 में इसे सीधे 4 पर ला दिया गया है।
इस कटौती के बाद आम उपभोक्ताओं और उज्ज्वला लाभार्थियों के गणित को इस तरह समझा जा सकता है:
| उपभोक्ता का प्रकार | बिना सब्सिडी के कीमत (दिल्ली) | मिलने वाली सब्सिडी | प्रभावी कीमत (पहले 4 सिलेंडर तक) |
| सामान्य उपभोक्ता | ₹942 | शून्य | ₹942 |
| उज्ज्वला लाभार्थी | ₹942 | ₹300 | ₹642 |
यानी पहले 4 रिफिल तक तो उज्ज्वला उपभोक्ताओं को ₹642 देने होंगे लेकिन पांचवां सिलेंडर लेते ही उन्हें भी सामान्य ग्राहकों की तरह पूरे ₹942 चुकाने पड़ेंगे।
सरकारी तेल कंपनियों पर भारी घाटा, आम आदमी बेहाल
मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार के लिए मौजूदा कीमतों पर गैस सप्लाई करना बेहद घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
आज की तारीख में एक घरेलू सिलेंडर को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की लागत ₹1,600 से ऊपर जा चुकी है। यही वजह है कि सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) हर सिलेंडर की बिक्री पर करीब ₹700 का नुकसान झेल रही हैं।
पेट्रोल-डीजल पर ₹6 से ₹30 प्रति लीटर तक के अंडर-रिकवरी घाटे और हाल ही में बढ़ी सीएनजी (CNG) की कीमतों के बीच सरकार ने सब्सिडी के इस बोझ को कम करने का रास्ता चुना है। लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि चूल्हे के धुएं से राहत पाने वाली ग्रामीण महिलाओं के लिए अब साल के बाकी महीने बिना सब्सिडी के रसोई चलाना एक अग्निपरीक्षा जैसा होगा।
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