Haryana News: ₹661 करोड़ के महाघोटाले में CBI का एक और बड़ा एक्शन, IAS अफसरों के बाद अब गिरफ्तार हुआ ये सरकारी कर्मचारी

हरियाणा के ₹661 करोड़ के बैंक घोटाले में CBI ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उसे 4 दिन के रिमांड पर भेजा है। मामले में पहले ही दो वरिष्ठ IAS अधिकारी आर.के. सिंह और पंकज अग्रवाल गिरफ्तार हो चुके हैं।

Haryana News: हरियाणा के सरकारी विभागों में हुए 661 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई अब बेहद आक्रामक हो चुकी है। दो कद्दावर आईएएस (IAS) अधिकारियों की सलाखों के पीछे रवानगी के बाद, जांच एजेंसी ने बुधवार को हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के एक कर्मचारी सौरभ शर्मा को धर दबोचा।

गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को पंचकूला की विशेष जिला अदालत में पेश किया गया जहां से उसे चार दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया है।

सीबीआई के मुताबिक सौरभ शर्मा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अकाउंट्स विंग में बतौर डाटा एंट्री ऑपरेटर तैनात था। लेकिन उसका काम सिर्फ फाइलों को टाइप करने तक सीमित नहीं था।

डिजिटल सबूत मिटाने का संगीन आरोप: जांच ब्यूरो ने अदालत में जो सबसे सनसनीखेज खुलासा किया, वह डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने से जुड़ा है। सीबीआई ने जब आरोपी सौरभ का मोबाइल फोन जब्त किया, तो उसमें से कई महत्वपूर्ण वॉट्सऐप चैट्स और बातचीत के रिकॉर्ड गायब मिले। एजेंसी का कहना है कि आरोपी डिलीट हुए डेटा को रिकवर करने में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहा है, जिससे साफ है कि उसने जांच भटकाने के लिए जानबूझकर सबूत मिटाए हैं।

सीबीआई के हाथ लगे दस्तावेजों के अनुसार 13 मार्च 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच इस घोटाले को अंजाम दिया गया। इस दौरान सरकारी खातों से करीब 187.26 करोड़ रुपये कई संदिग्ध डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए फर्जी (शैल) कंपनियों में ट्रांसफर किए गए। हेराफेरी के इस खेल में कुछ रकम वापस भी आई, लेकिन इसके बावजूद सरकारी खजाने को 169.35 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा और भारी नुकसान पहुंचा है।

आरोप है कि सौरभ शर्मा वित्त विभाग के नियमों और निवेश की सीमाओं को अच्छी तरह जानता था। इसके बाद भी उसने निजी बैंकों के एजेंटों को निवेश प्रस्तावों, ब्याज दरों और फंड मैच्योरिटी से जुड़ी गोपनीय सरकारी जानकारियां लीक कीं। इसी मिलीभगत का नतीजा था कि आईडीएफसी (IDFC) फर्स्ट बैंक में जहां सरकारी धन जमा करने की अधिकतम सीमा केवल 50 करोड़ रुपये तय थी वहां नियमों को ताक पर रखकर निवेश का आंकड़ा मार्च 2025 में 67.9 करोड़, जून में 105.68 करोड़ और अक्टूबर 2025 तक 113.68 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया।

इस मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुके दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों जिसमें आर.के. सिंह और पंकज अग्रवाल शामिल है से पूछताछ जारी है और माना जा रहा है कि इस रिमांड के दौरान सौरभ शर्मा कई और बड़े नामों का खुलासा कर सकता है।

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