राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट की FIR में 8 नामजद, 3 गिरफ्तार, 4 टीमें तलाश में जुटीं

अयोध्या में राम मंदिर (Ram Mandir) के चढ़ावा चोरी मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की ओर से रामजन्मभूमि कोतवाली में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई। शिकायत ट्रस्ट सदस्य श्रीकृष्ण मोहन ने विशेष जांच दल (SIT – Special Investigation Team) की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दी।

इन आठ लोगों को बनाया गया आरोपी

एफआईआर में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश और लवकुश मिश्रा को नामजद किया गया है।

पुलिस ने टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार अलग-अलग पुलिस टीमें गठित की गई हैं।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं चोरी, धोखाधड़ी (Fraud) और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों से संबंधित हैं।

उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के अनुसार, इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर सात वर्ष की सजा से लेकर उम्रकैद (Life Imprisonment) तक का प्रावधान है। कुछ धाराओं में जुर्माने की व्यवस्था भी शामिल है।

शिकायतकर्ता कौन हैं श्रीकृष्ण मोहन

मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले श्रीकृष्ण मोहन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। वह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं और भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service-IFS) के महाराष्ट्र कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी रह चुके हैं।

नागपुर में अपनी सेवा के दौरान उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh) से जुड़ाव रहा। वर्ष 2012 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2025 में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया।

जांच पर रहेगी आगे की नजर

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों (Evidence) और पुलिस की विवेचना पर निर्भर करेगी।

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