Haryana News: हरियाणा के अनुबंधित लेक्चररों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 6 महीने में होगा नियमितीकरण पर फैसला

Haryana News: हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत अनुबंधित लेक्चररों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने सरकार को नियमितीकरण के लंबित मामलों पर 6 महीने में फैसला लेने और देरी पर अधिकारियों को जुर्माने की चेतावनी दी है।

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Written By News Desk
19 Jun 2026, 2:15 PM IST

Haryana News: हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे अनुबंधित (Contractual) लेक्चररों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि कंप्यूटर साइंस (Computer Science), कॉमर्स (Commerce) और मैनेजमेंट (Management) विषयों के अनुबंधित लेक्चररों के नियमितीकरण (Regularization) से जुड़े लंबित मामलों पर तय समय सीमा के भीतर अंतिम फैसला लिया जाए।

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कोर्ट ने इस मामले को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि कर्मचारियों के भविष्य और सेवा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा माना है। इसी कारण अदालत ने सरकार को छह महीने के भीतर सभी लंबित दावों की समीक्षा कर कारण सहित निर्णय लेने का आदेश दिया है।

वर्षों से इंतजार कर रहे हैं लेक्चरर

हरियाणा के विभिन्न सरकारी कॉलेजों में बड़ी संख्या में ऐसे लेक्चरर कार्यरत हैं जो कई वर्षों से अनुबंध के आधार पर पढ़ा रहे हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि वे लगातार शैक्षणिक सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी को स्थायी स्वरूप देने के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति बने रहने से न केवल उनका पेशेवर भविष्य प्रभावित हो रहा है बल्कि सेवा लाभों (Service Benefits) और रोजगार सुरक्षा (Job Security) पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सरकार की देरी पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नियमितीकरण मामलों में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पात्र कर्मचारियों के मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित प्रशासनिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि समय पर निर्णय लेना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी है। यदि कर्मचारी वर्षों तक सेवा दे रहे हैं तो उनके दावों पर नियमों के अनुरूप विचार भी समयबद्ध तरीके से होना चाहिए।

अधिकारियों पर तय होगी जवाबदेही

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जवाबदेही (Accountability) का मुद्दा भी उठाया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की चेतावनी यह संकेत देती है कि अदालत अब प्रशासनिक मामलों में अनावश्यक देरी को गंभीरता से देख रही है और जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे उत्तरदायी ठहराने की दिशा में कदम उठा रही है।

अब उच्च शिक्षा विभाग को क्या करना होगा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग को सभी पात्र अनुबंधित लेक्चररों के रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी। इसके साथ ही विभाग को नियमितीकरण नीति और लागू नियमों के आधार पर प्रत्येक मामले की जांच करनी होगी।

सभी लंबित अभ्यावेदनों और दावों पर कारण सहित फैसला लेने के बाद सरकार को आदेश के अनुपालन की जानकारी भी देनी पड़ सकती है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

शिक्षकों में बढ़ी उम्मीद

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अनुबंधित लेक्चररों में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। कई शिक्षकों का मानना है कि लंबे समय से अटके इस मुद्दे पर पहली बार किसी न्यायिक मंच ने स्पष्ट समय सीमा तय की है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि समयबद्ध तरीके से निर्णय होता है तो इससे न केवल प्रभावित शिक्षकों को राहत मिलेगी बल्कि सरकारी कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था भी अधिक स्थिर हो सकेगी।

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