Petrol Excise Duty News: सरकार ने हाई एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर खत्म की एक्साइज ड्यूटी, E30 तक का रास्ता साफ

Petrol Excise Duty News: केंद्र सरकार ने E20 से ऊपर यानी E22 से E30 तक के हाई एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को पूरी तरह खत्म करने का नोटिफिकेशन जारी किया है।

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Written By Vinod Yadav
11 Jun 2026, 8:57 PM IST
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Petrol Excise Duty News: देश में पर्यावरण अनुकूल ईंधन (इको-फ्रेंडली फ्यूल) को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है।

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सरकार ने पेट्रोल में अधिक मात्रा में एथेनॉल मिलाकर तैयार किए जाने वाले ईंधन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह कर छूट उन सभी पेट्रोल वेरिएंट्स पर लागू होगी, जिनमें E20 (20 फीसदी मिश्रण) से अधिक एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है।

इस बड़े फैसले के बाद अब बाजार में E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर कोई उत्पाद शुल्क नहीं देना होगा। यह कदम रणनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार ने हाल ही में 30 फीसदी तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के कमर्शियल मानकों को हरी झंडी दी है।

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टैक्स छूट के इस फैसले से देश में हाई-ब्लेंडेड फ्यूल के व्यावसायिक उत्पादन और बिक्री का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

जानिए क्या है एक्साइज ड्यूटी और छूट के लिए अनिवार्य शर्तें

आमतौर पर घरेलू स्तर पर बनने वाले उत्पादों की रीढ़ माना जाने वाला उत्पाद शुल्क यानी एक्साइज ड्यूटी एक अप्रत्यक्ष कर है। यह देश की सीमाओं के भीतर निर्मित या उत्पादित होने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है जिसमें मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, शराब और तंबाकू जैसी वस्तुएं शामिल होती हैं। इस टैक्स को शून्य करने के पीछे सरकार का मकसद पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को आर्थिक रूप से किफायती बनाना है।

हाई एथेनॉल ईंधन को इस टैक्स छूट के दायरे में लाने के लिए सरकार ने एक अनिवार्य गाइडलाइन भी तय की है:

  • मानकों का पालन: उत्पाद शुल्क में यह छूट केवल तभी मिलेगी जब तैयार किया गया उच्च मिश्रण वाला ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित कड़े नियमों और गुणवत्ता के मानकों के बिल्कुल अनुरूप हो।

गन्ने के रस से लेकर काई तक: ऐसे तैयार होता है एथेनॉल

एथेनॉल मूल रूप से एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन (किण्वन) की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिक्स करके गाड़ियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सकता है। देश में एथेनॉल उत्पादन की कमान तीन अलग-अलग जेनरेशन की तकनीकों के हाथ में है:

  • फर्स्ट जेनरेशन एथेनॉल: इसका उत्पादन सीधे तौर पर खाद्य स्रोतों जैसे गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, मक्का, मीठे ज्वार और सड़े हुए आलू से किया जाता है।

  • सेकेंड जेनरेशन एथेनॉल: खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किए बिना इसे सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक कचरे जैसे- धान व गेहूं की भूसी, भुट्टे के बचे हुए हिस्से (कॉर्नकॉब), बांस और लकड़ी के बायोमास से तैयार किया जाता है।

  • थर्ड जेनरेशन बायोफ्यूल: यह भविष्य की तकनीक है जिस पर अभी तेजी से शोध चल रहा है। इसके तहत एथेनॉल या बायोफ्यूल का उत्पादन विशेष प्रकार की एलगी (काई/शैवाल) के जरिए किया जाएगा।

साफ है कि ईंधनों में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने और उस पर से टैक्स का बोझ हटने का सीधा फायदा न केवल देश के खजाने और पर्यावरण को मिलेगा बल्कि चीनी मिलों और कृषि क्षेत्र को भी एक नया आर्थिक आधार मिलेगा।

विश्वसनीयता और सत्यता रिपोर्ट
विश्वसनीयता स्कोर: 5/5 (पूर्णतः सत्यापित)

यह खबर विश्वसनीय स्रोतों द्वारा प्रमाणित है। NFL Spice के संपादकीय मानकों और तथ्य-जांच नीतियों के अनुरूप, इस समाचार की पुष्टि की गई है।

सत्यापित स्रोत: National Press

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पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता और न्यूज़ मीडिया से जुड़ा हूं और हरियाणा की जमीनी खबरों के साथ साथ व्यापार जगत की महत्वपूर्ण गतिविधियों को पाठकों तक पहुंचाने का का ...Read More

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