Sonipat News: सोनीपत में मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने धान की नर्सरियों और कपास फसलों का संयुक्त सर्वेक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने फसलों की वर्तमान स्थिति का आकलन किया और किसानों से सीधे संवाद कर कीट एवं रोग प्रबंधन से जुड़ी जानकारी साझा की।
अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि धान की बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य किया जाए।
उन्होंने बताया कि बीज उपचार करने से फसल को शुरुआती अवस्था में कई प्रकार के कीटों और रोगों से सुरक्षा मिलती है। इससे पिछले वर्ष कुछ क्षेत्रों में देखने को मिले बौनेपन रोग सहित अन्य समस्याओं के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उपायों के साथ-साथ यांत्रिक और जैविक नियंत्रण विधियों का उपयोग भी किया जाना चाहिए। इससे फसल की सुरक्षा बेहतर होगी और अनावश्यक कीटनाशक उपयोग को भी कम किया जा सकेगा।
सर्वेक्षण के दौरान किसानों को फसलों में कीटों की समय पर पहचान, रोगों के शुरुआती लक्षणों और उनके नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार खेती करने से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल लागत को भी नियंत्रित किया जा सकता है।






