बरसेगा पैसा – होगी बम्पर पैदावार, अगर बोई काली सरसों की ये उन्नत किस्मे

Subham Morya
Subham Morya - Author
Improved Varieties of Black Mustard

Improved Varieties of Black Mustard – सरसों की बुवाई का समय चल रहा है और कई राज्यों में सरसों की बुवाई हो चुकी है लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी है जहां अभी भी सरसों की बुवाई होनी बाकि है। सरसों की खेती सबसे अधिक भारत के गुजरात, आसाम, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान के साथ साथ पश्चिमी बंगाल में सबसे अधिक होती है। सरसों की फसल को एक नगदी की फसल के रूप में देखा जाता है। किसान भाइयों को अगर सरसों की फसल से बम्पर पैदावार लेनी है तो इसके लिए बेहतरीन किस्मों का चुनाव करना भी बहुत जरुरी होता है।

सरसों की बहुत सी उन्नत किस्मे इस समय मर्केट में मौजूद है और इन किस्मो में अलग अलग गन पाए जाते है। कुछ सरसों की किस्मे इसी भी होती है जिनमे तेल की मात्रा बहुत अधिक होती है। भारत की बात करे तो भारत में पिली और काली दो तरफ की सरसों की खेती की जाती है। इनमे पिली सरसों के मुकाबले में काली सरसों में तेल की मात्रा अधिक पाई जाती है। पिली सरसों में तेल की मात्रा अधिक नहीं होती इसलिए इसकी खेती भी बहुत कम मात्रा में की जाती है।

इस आर्टिकल में हम आपको काली सरसों की उन्नत किस्मो के बारे में बताने वाले है। हम यहां आपको सरसों की उन उन्नत किस्मों के बारे में बताएँगे को बम्पर पैदावार तो किसान भाइयों को देती ही हैं साथ में उनमे तेल की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। इस किस्मों के दानो में वजन अधिक होता है जिसकी वजह से खेत में झड़त भी किसानो को अधिक मिलती है। ये किस्मे जब पकाव पर आती है तो सरसों के दानो के वजन के कारण जमीन की और पौधा पूरी तरफ झुकने लगता है।

सरसों की उन्नत किस्म – पायनियर 45S46

सरसों की ये उन्नत किस्म पायनियर सीड्स की एक बहुत ही शानदार संकर किस्म है जो किसानो भाइयों को मालामाल कर देती है। इसकी खेती में झड़त बहुत अधिक होती है और इसके दानो में तेल की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। सरसों की पायनियर 45S46 किस्म में तेल की मात्रा लगभग 42 फीसदी के आसपास होती है।

सरसों की पायनियर 45S46 किस्म की बुवाई के बाद ये 120 से 130 दिन के अंदर पक का तैयार हो जाती है और किसान भाइयों को पैदावार मिल जाती है। किसानो को सरसों की पायनियर 45S46 किस्म से प्रति एकड़ में लगभग 10 से लेकर 14 क्विंटल तक की पैदावार आसानी से मिल जाती है और इसके साथ ही आपको बता दें की ये किस्म सरसों में लगने वाले प्रमुख रोग तना गलन के प्रति बहुत अधिक रोग प्रतिरोधी होती है जिससे किसानो को नुकसान बहुत ही कम होता है।

सरसों की पायनियर 45S46 किस्म को अगर आप अपने खेत में बुवाई करना कहते है तो इसकी बुवाई का समय 15 अक्टूबर से लेकर 15 नवम्बर तक का होता है और एक एकड़ में किसानो को इसकी बुवाई करने के लिए लगभग 800 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक बीजों की आवशयकता पड़ती है।

सरसों की उन्नत किस्म – स्टार 10-15

सरसों की ये किस्म भी एक संकर किस्म है जो की एग्रीसीड्स के द्वारा विकसित की गई है और इस किस्म में सबसे बड़ी बात ये होती है की इसमें सिंचाई बाकि किस्मों की तुलना में कम करनी होती है। ज्यादातर मामलो में ये देखा गया है की दो सिंचाई में सरसों की ये किस्म पककर तैयार हो जाती है। सरसों की ये किस्म भी पायनियर 45S46 की तरफ तेल की मात्रा से भरपूर होती है और किसानो को इससे पैदावार भी अधिक मिलती है।

स्टार 10-15 किस्म को इस हिसाब से विकसित किया गया है की ये सभी प्रकार की मिटटी में आसानी से पीडवार दे में सक्षम है और इसकी बुवाई के बाद ये लगभग 120 से 130 दिन में पककर तैयार हो जाती है। आपने देखा होगा की जब सर्दियों में पाला गिरता है तो सबसे ज्यादा नुकसान सरसों की फसल को होता है। लेकिन इस किस्म को पाले के प्रति सवेंदनशील बनाया गया है और पाला गिरने के कारण इसमें नुकसान ना के बराबर होता है।

सरसों की इस किस्म में तेल की मात्रा पायनियर 45S46 किस्म की तरफ बहुत अधिक होता है। इस किस्म से किसानो को लगभग 42 फीसदी तक तेल की मात्रा आसानी से मिल जाती है। किसान भाई अगर सरसों की इस किस्म की खेती करते है तो उनको प्रति अकड़ के हिसाब से आसानी से 12 से 15 क्विंटल तक की पैदावार मिल जाती है। इस किस्म की एक एकड़ में बुवाई करने के लिए किसान भाइयों को लगभग 800 ग्राम बीजों की जरुरत होती है। बुवाई करते समय पौधे से पौधे और नाली से नाली के बीच की दुरी का अगर सही से ध्यान रखा जाए तो इस किस्म में फुटाव होने के बाद में पौधे से बहुत अधिक पैदावार मिलती है।

सरसों की उन्नत किस्म – धान्या MJ1

सरसों की ये किस्म पछेती किस्म मानी जाती है और इसको अगर किसान भाई अपने खेतो में बुवाई करना चाहते है तो इसकी बुवाई का समय नवम्बर में लगभग 5 से लेकर 15 नवम्बर तक का होता है। सरसों की इस किस्म को टाटा इंडिया लिमिटेड के द्वारा विकसित किया गया है और ये भी एक शंकर किस्म है।

किसान भाई अगर इस किस्म को अपने खेतों में बुवाई करना चाहते है तो बुवाई के बाद ये किस्म लगभग 110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। किसानो को इस किस्म की खेती से प्रति अकड़ में लगभग 12 क्विंटल तक की पैदावार आसानी से मिल जाती है। इस किस्म की बुवाई के समय बीजों की मात्रा थोड़ी अधिक लगती है। एक एकड़ में अगर किसान भाई इसकी बुवाई करना चाहते है तो उनको लगभग 1 किलोग्राम बीजों की जरुरत पड़ने वाली है।

सरसों की उन्नत किस्म – क्रिस्टल प्रोएग्रो 5222

सरसों की इस किस्म से किसान भाइयों को अधिक उत्पादन मिलता है और ये बुवाई के बाद लगभग 120 से 135 दिन में पककर तैयार हो जाती है। सरसों की इस किस्म से किसान भाई मालामाल हो जाते है क्योंकि इस किस्म के दाने मोठे और भरे भरे होते है जिनमे वजन भी अधिक होता है।

इस किस्म में तेल की मात्रा किसान भाइयों को लगभग 42 फीसदी के आसपास मिल जाती है। एक एकड़ में अगर किसान भाई इसकी खेती कर रहे है तो उनको बड़े आसानी से लगभग 11 क्विंटल पैदावार मिल जाती है। एक एकड़ में इस किस्म की खेती करने के लिए अलगभग 1 कीआगराम बीजों की जरुरत होती है। सरसों की इस किस्म में भी अगर पौधे से पौधा और नाली से नाली की दुरी बहुत मायने रखती है।

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मैं शुभम मौर्या पिछले 2 सालों से न्यूज़ कंटेंट लेखन कार्य से जुड़ा हुआ हूँ। मैं nflspice.com के साथ में मई 2023 से जुड़ा हुआ हूँ और लगातार अपनी न्यूज़ लेखन का कार्य आप सबसे के लिए कर रहा हूँ। न्यूज़ लेखन एक कला है और सबसे बड़ी बात की न्यूज़ को सही ढंग से समझाना ही सबसे बड़ी कला मानी जाती है और इसी कोशिश में इसको लगातार निखारने का प्रयास कर रहा हूँ।
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