रसोई गैस ₹29 महंगी होने पर सरकार का बड़ा दावा- हर सिलेंडर पर अब भी दे रहे ₹700 की छूट, उज्ज्वला वालों को लगेगा ₹2,303 का झटका!
LPG Cylinder Price Hike: एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹29 बढ़ने के बाद सरकार ने कहा है कि उपभोक्ताओं को अब भी ₹700 की भारी राहत मिल रही है। हालांकि, उज्ज्वला योजना के नियमों में हुए बदलाव और कीमतों में बढ़ोतरी से गरीब परिवारों के बजट पर ₹2,303 का सीधा बोझ पड़ेगा।
LPG Cylinder Price Hike: घरेलू रसोई गैस (LPG) के दामों में हाल ही में हुई 29 रुपये की बढ़ोतरी को लेकर आम जनता के बीच मचे घमासान पर अब सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आया है। सरकार ने इस बढ़ोतरी को बेहद मामूली बताते हुए दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को अब भी एलपीजी पर भारी-भरकम राहत दी जा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की असल लागत इस समय 1,600 रुपये से भी ज्यादा है लेकिन आम जनता को यह महज 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार की मानें तो इस तरह हर आम उपभोक्ता को प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये की परोक्ष (अप्रत्यक्ष) राहत मिल रही है जो सालाना आधार पर 8,400 रुपये बैठती है।
किचन बजट का पूरा गणित
भले ही सरकार इसे प्रति सदस्य महज 20 पैसे प्रतिदिन की मामूली बढ़ोतरी बता रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मिडिल क्लास के किचन का बजट सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है।
साल 2026 की शुरुआत से अब तक मार्च और जून में हुए दो बड़े प्राइस हाइक के बाद, अगर कीमतें साल के अंत (दिसंबर 2026) तक स्थिर भी रहती हैं तो एक सामान्य परिवार की जेब पर प्रत्यक्ष रूप से 803 रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ पड़ना तय है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर दोहरी मार
पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा के अनुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी के साथ कुल 1,000 रुपये प्रति सिलेंडर का फायदा दिया जा रहा है। लेकिन इस राहत के पीछे का एक कड़वा सच यह भी है कि इस वित्त वर्ष (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027) से सरकार ने सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या सालाना 9 से घटाकर सिर्फ 4 कर दी है।
सरकार का तर्क है कि उज्ज्वला परिवार औसतन साल में 4 से 5 सिलेंडर ही इस्तेमाल करते हैं। मगर जो गरीब परिवार साल में 12 सिलेंडर रीफिल करवाते हैं उन्हें इस फैसले से तगड़ा झटका लगा है:
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सब्सिडी कटौती से नुकसान: पहले 9 सिलेंडरों पर मिलने वाली ₹2,700 की सब्सिडी अब सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ₹1,200 रह गई है। यानी सीधे ₹1,500 का घाटा।
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दाम बढ़ने का असर: मार्च और जून की बढ़ोतरी मिलाकर ₹803 का एक्स्ट्रा खर्च।
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कुल सालाना बोझ: दोनों झटकों को मिलाकर उज्ज्वला लाभार्थियों के बजट पर कुल ₹2,303 की सीधी चपत लगेगी।
लब्बोलुआब यह है कि कागजी तौर पर भले ही सरकार की अप्रत्यक्ष राहत की दलील सही दिखे लेकिन असलियत में आम आदमी और गरीब परिवारों की जेब से नकद पैसा ज्यादा खर्च हो रहा है।
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