Haryana News: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में नगर परिषद यमुनानगर और नगर परिषद जगाधरी क्षेत्र की उन कॉलोनियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया जिनमें वर्ष 1996 के दौरान भवनों को नियमित किया गया था।
सरकार का यह कदम लंबे समय से लंबित प्रशासनिक और तकनीकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अहम माना जा रहा है।
एनडीसी पोर्टल लागू होने के बाद सामने आई थी समस्या
वर्ष 2021-22 में शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जीआईएस आधारित संपत्ति रिकॉर्ड के साथ एकीकृत ऑनलाइन नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC) पोर्टल शुरू किया था।
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इस डिजिटल व्यवस्था में किसी भी क्षेत्र को शामिल करने के लिए उसकी स्पष्ट और जियो-रेफरेंस्ड सीमाएं आवश्यक थीं। लेकिन वर्ष 2005 से पहले नियमित की गई कई कॉलोनियों के पास स्वीकृत लेआउट प्लान और खसरा नंबरों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
इसके चलते इन क्षेत्रों के कई खाली या गैर-मैप्ड भूखंडों को सिस्टम ने स्वतः अस्वीकृत श्रेणी में दर्ज कर दिया। Haryana News
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संपत्ति मालिकों को हो रही थीं कई परेशानियां
धारा 203ए के तहत अधिसूचित इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को प्रॉपर्टी आईडी, भवन योजना स्वीकृति और संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
स्पष्ट सीमांकन नहीं होने के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे थे और संपत्ति रिकॉर्ड को एनडीसी पोर्टल से जोड़ना संभव नहीं हो पा रहा था।
अब बनेगी विशेष समिति
इन समस्याओं के समाधान के लिए कैबिनेट ने नगर निगम यमुनानगर में एक विशेष समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। Haryana News
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समिति की अध्यक्षता नगर निगम आयुक्त करेंगे। इसमें मुख्य नगर योजनाकार या जिला नगर योजनाकार, मुख्य अभियंता या अधीक्षक अभियंता, अतिरिक्त नगर आयुक्त, कार्यकारी अधिकारी, मेयर के नामित प्रतिनिधि, राजस्व अधिकारी, कार्यकारी अभियंता और जोनल कराधान अधिकारी शामिल होंगे।
कॉलोनियों की पहचान कर तय की जाएंगी सीमाएं
समिति उन कॉलोनियों की पहचान करेगी जहां 26 सितंबर 2013 से पहले धारा 203ए के तहत भवन नियमित किए गए थे और जिनकी अधिसूचना सरकारी आदेश या राजपत्र के माध्यम से जारी हुई थी। Haryana News
ऐसी कॉलोनियों में जहां स्वीकृत लेआउट प्लान और खसरा नंबर उपलब्ध नहीं हैं वहां समिति बाहरी सीमा रेखाएं निर्धारित करेगी और विस्तृत प्रस्ताव तैयार करेगी।
सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से संपत्ति रिकॉर्ड को एनडीसी पोर्टल से जोड़ने में मदद मिलेगी और इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास का रास्ता साफ होगा।
विकास शुल्क को लेकर भी हुआ निर्णय
कैबिनेट ने विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) से जुड़े प्रावधानों को भी मंजूरी दी है। Haryana News
जिन संपत्ति मालिकों ने वर्ष 1996 में कॉलोनी की अधिसूचना के समय या उससे पहले भवन निर्माण कराया था लेकिन विकास शुल्क जमा नहीं कराया था उन्हें उस समय लागू दरों के अनुसार शुल्क जमा करना होगा।
वहीं जिन लोगों ने पहले ही विकास शुल्क का भुगतान कर दिया है उन्हें पोर्टल पर प्रदर्शित शुल्क से छूट पाने के लिए भुगतान संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
