Sirsa News: सिरसा जिले की बेटी सविता पूनिया को पद्मश्री, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

Sirsa News: हरियाणा के सिरसा जिले की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया को मंगलवार को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

भारतीय महिला राष्ट्रीय हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और मौजूदा गोलकीपर सविता पूनिया लंबे समय से भारतीय हॉकी की मजबूत दीवार मानी जाती हैं। खेल जगत में उन्हें “द ग्रेट वॉल” के नाम से भी जाना जाता है।

टोक्यो ओलिंपिक से मिली थी नई पहचान

टोक्यो ओलिंपिक 2020 के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सविता पूनिया ने आठ पेनल्टी कॉर्नर बचाकर भारतीय टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “द ग्रेट वॉल” की पहचान मिली। उस ओलिंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम चौथे स्थान पर रही थी और सविता टीम की उप-कप्तान थीं।

सम्मान मिलने पर भावुक हुईं सविता

पद्मश्री मिलने के बाद सविता पूनिया ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए, उनके परिवार और पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया था तब कभी नहीं सोचा था कि उन्हें देश का इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। कई बार ऐसे हालात बने जब खेल छोड़ने का विचार आया, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

सविता ने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली बेटियों को यदि परिवार का समर्थन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती हैं।

उपलब्धियों से भरा रहा करियर

सविता पूनिया को इससे पहले वर्ष 2018 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

वह लगातार तीन बार FIH गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। उनकी कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था।

इसके अलावा भारतीय टीम ने एफआईएच नेशंस कप का खिताब भी उनके नेतृत्व में हासिल किया। सविता पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर हैं।

सिरसा के गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

सविता पूनिया का जन्म 11 जून 1990 को सिरसा जिले के जोधकां गांव में हुआ था। उनके पिता महेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट रहे हैं, जबकि माता लीलावती गृहिणी हैं।

उन्होंने शुरुआती हॉकी प्रशिक्षण सिरसा की अग्रसेन नर्सरी में लिया और बाद में हिसार स्थित साई सेंटर में अभ्यास किया। कोच आजाद सिंह मलिक के मार्गदर्शन में उनका खेल निखरा।

वर्ष 2007 में उनका चयन भारतीय सीनियर राष्ट्रीय हॉकी कैंप के लिए हुआ और 2011 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी करियर की शुरुआत की। लंबी कद-काठी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता के कारण उन्हें गोलकीपर की जिम्मेदारी दी गई।

दादा से मिली प्रेरणा

सविता अपने दादा रणजीत सिंह को अपना रोल मॉडल मानती हैं। परिवार के अनुसार, दादा ने ही उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया था।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली सविता आज हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

परिवार का भी मिला भरपूर साथ

सविता की शादी वर्ष 2021 में हरियाणा के सोनीपत निवासी अंकित बल्हारा से हुई थी। उनके पति कनाडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

खेल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कारण सविता का अधिकांश समय राष्ट्रीय टीम के साथ या अपने मायके में बीतता है। परिवार के सहयोग को वह अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं।

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