दिल्ली स्मॉग 2025: क्यों हर नवंबर में बन जाती है राजधानी 'गैस चैंबर'? पढ़ें रिपोर्ट
दिल्ली के टॉप 6 असली विलेन
- पराली का धुआं (Stubble Burning): पंजाब-हरियाणा के किसान धान की पराली जला रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी हवाएं ये धुआं सीधे दिल्ली ला रही हैं। हाल ही में हुई प्रदूषण बोर्ड की रिसर्च कहती है नवंबर में 32% प्रदूषण सिर्फ पराली से। इस बार बाढ़ की वजह से जलाना 1 हफ्ता लेट शुरू हुआ लेकिन पीक अब आएगा।
- सुस्त हवाएं + टेंपरेचर इन्वर्जन: हवा की स्पीड 8 किमी/घंटा से नीचे होना भी इसकी बड़ी वजह है। ठंडी हवा नीचे, गर्म हवा ऊपर होने के चलते प्रदूषक फंस जाता है ओर बिना हवा के एक ही इलाके में रुक जाता है।
- दिवाली की आतिशबाजी: दिवाली का पटाखा बोनस में प्रदूषण दे जाता है इसमें भी कोई दो राय नहीं होनी चाहिए। ग्रीन क्रैकर की छूट मिली थी लेकिन PM2.5 रातोंरात 1800 µg/m³ तक पहुंचा। अब भी आफ्टर-इफेक्ट बाकी है।
- गाड़ियां + इंडस्ट्री + कचरा: दिल्ली में 15% PM2.5 सिर्फ वाहनों से, कंस्ट्रक्शन डस्ट + कचरा जलाना मिलाकर 30% होता है। हालांकि BS-III पेट्रोल, BS-IV डीजल गाड़ियां अब बैन कर दी गई है।
ये प्रदूषण कितना खतरनाक? ये है आंकड़े
क्या कर रही सरकार?
अब बात करते है कि सरकार क्या कर रही है। सरकार ने GRAP-3 लागू कर दिया, पुरानी गाड़ियां बैन, कंस्ट्रक्शन का काम रुकवा दिया, स्मॉग गन, पानी का छिड़काव, ऑड-ईवन की तैयारी भी सरकार करती है इसको लेकर। लेकिन क्या आपको लगता है कि ये इसका असली इलाज है? पराली के लिए हैप्पी सीडर मशीन सब्सिडी सरकार दे रही है लेकिन फिर भी किसान पराली जलाना अधिक पसंद कर रहे है।इलेक्ट्रिक बसें चलाई गई, कोयला प्लांट बंद बंद कर दिए लेकिन दिल्ली को आबोहवा में वो पहले वाली मिठास लौट कर आने का नाम ही नहीं ले रही। बस आप सभी एक बात ध्यान रखो सभी दिल्ली वाले की ये स्मॉग आज है ओर कल चला जाएगा। लेकिन फेफड़े आपके साथ जिंदगीभर रहेंगे और इसका ख्याल रखना आपकी जिम्मेदारी है। विनोद यादव की रिपोर्ट (एनएफएल स्पाइस न्यूज डेस्क)