झारखंड में बिजली और शहरी विकास योजनाओं की समीक्षा, 20 हजार आदिवासी परिवारों तक बिजली पहुंचाने पर जोर

Jharkhand News: रांची में शुक्रवार को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में झारखंड के शहरी विकास और बिजली क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन, सार्वजनिक शौचालयों, ड्रेनेज (Drainage) और सीवरेज (Sewerage) व्यवस्था, ठोस कचरा प्रबंधन (Waste Management) तथा शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट और प्रीपेड बिजली मीटर लगाने की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि झारखंड में बिजली वितरण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करना और आदिवासी क्षेत्रों के करीब 20 हजार ऐसे परिवारों तक बिजली पहुंचाना, जो अभी तक इससे वंचित हैं, केंद्र सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि जिन इलाकों में बिजली आपूर्ति की चुनौतियां बनी हुई हैं, वहां प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सौर ऊर्जा (Solar Power) का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा

समीक्षा बैठक में शहरों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने, सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता बढ़ाने, जल निकासी तंत्र को सुधारने और कचरा प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे शामिल रहे।

इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर और प्रीपेड मीटर लगाने की योजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। इन योजनाओं का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने मांगी विशेष रियायत

बैठक में मौजूद झारखंड के शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं में अधिक लचीलापन (Flexibility) और विशेष विचार करने का अनुरोध किया गया है।

उन्होंने बताया कि बैठक में दामोदर घाटी निगम (DVC) कमांड क्षेत्र में बिजली वितरण को लेकर भी चर्चा हुई। इसके तहत झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) और डीवीसी के बीच एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) विकसित करने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।

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