शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

10 साल पहले जंगल में मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास की मौत, लंबी लड़ाई के बाद थमी जिंदगी

Written by: Vinod Yadav

Published:

कतरनियाघाट के जंगलों में 2017 में मिली ‘मोगली गर्ल’ के नाम से चर्चित एहसास का निधन हो गया। पोस्टमार्टम में फेफड़ों के संक्रमण से पैदा हुई सेप्टीसीमिया को मौत का कारण बताया गया है।


10 साल पहले जंगल में मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास की मौत, लंबी लड़ाई के बाद थमी जिंदगी
10 साल पहले जंगल में मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास की मौत, लंबी लड़ाई के बाद थमी जिंदगी
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Mowgli Girl Death: करीब एक दशक पहले उत्तर प्रदेश के कतरनियाघाट के जंगलों से मिली उस बच्ची की कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींचा था जिसे लोग वास्तविक जीवन की ‘मोगली गर्ल’ कहने लगे थे। अब उसी बच्ची एहसास की जिंदगी का सफर 15 जून को समाप्त हो गया।

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अधिकारियों के अनुसार, उसकी मौत लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों के संक्रमण (Lung Infection) से पैदा हुई सेप्टीसीमिया (Septicaemia) को मौत का कारण बताया गया है। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

बीमारी के बाद बिगड़ी थी हालत

जानकारी के मुताबिक, एहसास को 8 जून को तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद उसकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ और 11 जून को उसे छुट्टी दे दी गई।

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10 साल पहले जंगल में मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास की मौत, लंबी लड़ाई के बाद थमी जिंदगी

हालांकि, 15 जून को उसकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पहुंचने के कुछ ही समय बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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2017 में जंगल से मिली थी बच्ची

एहसास पहली बार जनवरी 2017 में सुर्खियों में आई थी। वह बहराइच जिले के कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) के मोतीपुर क्षेत्र की एक सड़क पर अकेली मिली थी।

उस समय अधिकारियों और डॉक्टरों ने उसके व्यवहार को बेहद असामान्य पाया था। वह लोगों से डरती थी कपड़े पहनने से इनकार करती थी, चारों हाथ-पैरों के सहारे चलती थी और सामान्य मानवीय संवाद स्थापित करने में कठिनाई महसूस करती थी। यही वजह रही कि उसकी तुलना प्रसिद्ध काल्पनिक पात्र ‘मोगली’ से की जाने लगी।

पहले पूजा, फिर बना एहसास नाम

बचाव के बाद बहराइच की बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) ने उसका नाम शुरुआत में पूजा रखा था। बाद में मोहन रोड स्थित निरवान राजकीय बाल गृह विशिष्टीकृत में उसका नाम बदलकर एहसास कर दिया गया।

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प्रारंभिक उपचार के बाद अप्रैल 2017 में उसे निरवान फाउंडेशन भेजा गया जहां उसके पुनर्वास (Rehabilitation) और देखभाल का काम शुरू हुआ।

देखभाल से दिखा था सुधार

फाउंडेशन से जुड़े लोगों के अनुसार, देखभाल करने वाली कर्मचारियों माया और रेनू के साथ रहने के दौरान उसके व्यवहार में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले थे।

संस्था से जुड़ी रानी ने बताया कि वह उन्हें “अम्मा” कहकर पुकारती थी। देखभाल करने वाले लोग उम्मीद कर रहे थे कि समय के साथ उसकी स्थिति और बेहतर होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

मानसिक विकास पर पड़ा था गहरा असर

वर्षों तक चले उपचार और पुनर्वास के बावजूद डॉक्टरों का मानना था कि उसका मस्तिष्कीय विकास (Brain Development) गंभीर रूप से प्रभावित रहा। इसके कारण उसे बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) का सामना करना पड़ रहा था।

इसके अलावा उसे बार-बार मिर्गी के दौरे (Epileptic Seizures) भी आते थे और वह लंबे समय से चिकित्सकीय निगरानी में थी।

एहसास की कहानी सिर्फ एक बच्ची के बचाव की कहानी नहीं थी बल्कि यह उस कठिन संघर्ष की भी कहानी थी जिसमें समाज, डॉक्टरों और देखभाल करने वालों ने उसे सामान्य जीवन के करीब लाने की कोशिश की। अब उसके निधन के साथ देश की सबसे चर्चित मानव-रुचि (Human Interest) कहानियों में से एक का अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया।

Vinod Yadav
About the Author Vinod Yadav

नमस्कार! मेरा नाम विनोद यादव है और मैंने कृषि और टेक्सटाइल विषय के साथ में बी-टेक किया है। मौजूदा समय में एक जर्मनी बेस्ड टेक्सटिल कंपनी में प्रोडक्शन हेड के तौर पर कार्य कर रहा हूँ और साथ में कृषि के कार्यों को देखता हूँ। किसान परिवार में पैदा होने के चलते कृषि से शुरू से ही एक अलग प्रकार का जुड़ाव रहा है। रोजाना यहां हरियाणा से जुड़ी और हरियाणा प्रदेश के किसानों से जुड़ी ख़बरों को अपडेट करता हूँ। View all posts by Vinod Yadav →

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