Pakistan-Afghanistan War Live: काबुल और कंधार पर पाकिस्तान की भारी बमबारी, तालिबान ने दी 'ओपन वार' की चेतावनी
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव युद्ध में तब्दील हो गया है। पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान ने जवाबी ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया है, जबकि UN ने शांति की अपील की है। जानिए क्या है पूरा विवाद।
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शनिवार की वो सुबह डूरंड रेखा के आस-पास रहने वाले लोगों के लिए किसी डरावने सपने जैसी रही। जब दुनिया सो रही थी, तब अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सरहद गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों से गूँज उठी।
यह महज एक मामूली सीमा विवाद नहीं लग रहा, बल्कि ऐसा लग रहा है जैसे दोनों पड़ोसियों के बीच सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है।
ताजा रिपोर्ट्स की मानें तो मीरानशाह और स्पिनवाम में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार दावों में 'ड्रोन हमलों' का जिक्र है।
अगर यह सच है, तो यह युद्ध के तरीके में एक बड़ा और खतरनाक बदलाव है।
खोस्त का बदला या कुछ और?
दरअसल, यह भड़कती आग अचानक नहीं लगी। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने हाल ही में खोस्त और पक्तिया प्रांतों में हवाई हमले किए थे। तालिबान इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा था।
जानकारों का कहना है कि आज तड़के जो कुछ भी हुआ, वह तालिबान का 'डायरेक्ट मैसेज' है कि अब वो सिर्फ बचाव नहीं करेंगे, बल्कि घर में घुसकर जवाब भी देंगे।
"सीमा पर रहने वाले परिवारों में दहशत का माहौल है। लोग घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों की ओर भाग रहे हैं। स्थिति वैसी ही है जैसी दो दुश्मन देशों के बीच युद्ध की शुरुआत में होती है।"
दुनिया की नजरें, क्या टलेगा संकट?
हालात की गंभीरता को देखते हुए अब ग्लोबल प्लेयर्स मैदान में आ गए हैं। सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे देश पर्दे के पीछे से फोन कॉल और डिप्लोमेसी के जरिए आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं।
इन देशों को डर है कि अगर यह टकराव बढ़ा, तो पूरा क्षेत्र अस्थिर हो जाएगा, जिसका असर सीधा वैश्विक राजनीति पर पड़ेगा।
इस्लामाबाद/काबुल: दक्षिण एशिया (South Asia) के दो पड़ोसी मुल्क, जो कभी एक-दूसरे के हमदर्द हुआ करते थे, अब बारूद की भाषा बोल रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब 'कोल्ड वॉर' की सीमाओं को लांघकर 'ओपन वार' (Open War) यानी सीधे युद्ध में बदल चुका है।
शुक्रवार को पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और तालिबान के गढ़ कंधार सहित कई शहरों पर भीषण बमबारी की। इस हमले ने न केवल तालिबान की सत्ता को चुनौती दी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा पैदा कर दिया है।
सर्जिकल स्ट्राइक या सीधे युद्ध का ऐलान?
पाकिस्तान का दावा है कि यह हमला उन आतंकी ठिकानों (Terrorist Hideouts) पर किया गया है, जहाँ से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाके इस्लामाबाद सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहे थे। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इसमें निर्दोष नागरिक हताहत हुए हैं।
यह टकराव तब और बढ़ गया जब तालिबान ने जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Action) करते हुए पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर ड्रोन हमले किए।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के कड़े शब्दों ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा, "हमारे सब्र का बांध टूट चुका है, अब यह हमारे और तुम्हारे बीच खुला युद्ध है।"
तालिबान का 'शांति' कार्ड और वैश्विक चिंता
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ सीमा पर तोपें गरज रही हैं, वहीं दूसरी तरफ तालिबान अब बातचीत (Negotiations) की मेज पर आने की इच्छा जता रहा है।
मुजाहिद ने कहा कि वे मुद्दों को कूटनीति (Diplomacy) से सुलझाना चाहते हैं। लेकिन विशेषज्ञ इसे तालिबान की 'गुरिल्ला रणनीति' (Guerrilla Tactics) का हिस्सा मान रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इस पर गहरी चिंता जताई है। वहीं, अमेरिका ने खुलकर पाकिस्तान के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का समर्थन किया है। अमेरिका का कहना है कि तालिबान अपने आतंकवाद विरोधी वादों (Counterterrorism Commitments) को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।
मानवीय संकट का गहराता साया
युद्ध की इस आहट के बीच सबसे ज्यादा पीस रही है वहां की जनता। अफगानिस्तान की लगभग आधी आबादी पहले से ही मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पर निर्भर है। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह इलाका एक बड़े मानवीय शरणार्थी संकट (Refugee Crisis) की ओर बढ़ सकता है।
कतर और तुर्की जैसे देश एक बार फिर मध्यस्थता (Mediation) की कोशिशों में जुट गए हैं, लेकिन फिलहाल शांति दूर की कौड़ी नजर आ रही है।