इजरायली एयरस्ट्राइक में ईरान का सैन्य नेतृत्व ढेर? IRGC चीफ और रक्षा सलाहकार के खात्मे से मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा
इजरायल ने ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए IRGC कमांडर और सर्वोच्च नेता के सलाहकार सहित कई शीर्ष अधिकारियों को मारने का दावा किया है। अमेरिका-इजरायल के इस संयुक्त एक्शन से क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
तेहरान/तेल अवीव: पश्चिम एशिया (Middle East) इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने एक बेहद सटीक और घातक सैन्य अभियान (Military Operation) को अंजाम देते हुए दावा किया है कि उन्होंने ईरान के सैन्य ढांचे की रीढ़ तोड़ दी है।
इजरायली वायुसेना के सैकड़ों लड़ाकू विमानों ने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जहां देश का शीर्ष सैन्य नेतृत्व (Military Leadership) एक गुप्त बैठक के लिए जुटा था।
इस हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के चीफ और सुप्रीम लीडर के करीबी सलाहकार सहित कई दिग्गजों के मारे जाने की खबर है।
इजरायल का कहना है कि यह हमला केवल जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि ईरान के 'टेरर नेटवर्क' को जड़ से उखाड़ने की एक सोची-समझी रणनीति (Strategy) का हिस्सा है।
हालांकि तेहरान ने अभी तक इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन सूत्रों का कहना है कि ईरान के सत्ता गलियारों में सन्नाटा पसरा है।
इन दिग्गजों के खात्मे का दावा: इजरायल की 'हिट लिस्ट' हुई पूरी?
इजरायली खुफिया एजेंसी (Intelligence Directorate) की सटीक जानकारी पर हुए इस हमले में सबसे बड़ा नाम अली शमखानी का सामने आ रहा है।
शमखानी जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार थे, ईरान की रक्षा नीतियों के मास्टरमाइंड माने जाते थे।
उनके साथ ही मोहम्मद पाकपुर जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ग्राउंड फोर्स कमांडर थे, उनके भी मारे जाने का दावा किया गया है।
पाकपुर पर इजरायल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों की साजिश रचने का आरोप था।
इसके अलावा रक्षा मंत्री अजीज नसीरज़ादे और ईरान के परमाणु व उन्नत हथियार कार्यक्रम (SPND) से जुड़े कई वैज्ञानिकों और अधिकारियों के भी इस स्ट्राइक में ढेर होने की खबर है।
क्या यह 'ऑपरेशन डूम्सडे' की शुरुआत है?
रक्षा विशेषज्ञों (Defense Analysts) का मानना है कि यह हमला पिछले साल की शत्रुता का केवल विस्तार नहीं है बल्कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) और उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी (Hezbollah & Hamas) के बीच के संपर्क को काटने की कोशिश है।
यदि इजरायल के दावे सही साबित होते हैं तो ईरान के पास नेतृत्व का एक बड़ा शून्य (Leadership Vacuum) पैदा हो जाएगा जिसे भरना आसान नहीं होगा।
अमेरिका की इसमें शामिल भूमिका संकेत देती है कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के हथियार प्रसार को रोकने के लिए सीधे टकराव के मूड में है।



