रेवाड़ी एम्स में इसी सत्र से शुरू होगी MBBS की पढ़ाई, डीसी ने दिए निर्माण कार्य तेज करने के सख्त निर्देश

Vinod Yadav
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रेवाड़ी एम्स में इसी सत्र से शुरू होगी MBBS की पढ़ाई, डीसी ने दिए निर्माण कार्य तेज करने के सख्त निर्देश

Haryana News: हरियाणा के दक्षिणी हिस्से और खास तौर पर अहीरवाल क्षेत्र के लिए विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी जा रही है, जिसका इंतजार बरसों से था। रेवाड़ी के माजरा भालखी में बन रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में इसी साल से डॉक्टरी की पढ़ाई का शंखनाद होने जा रहा है।

यह महज एक सरकारी इमारत का निर्माण नहीं है, बल्कि इस इलाके के उन हजारों युवाओं के सपनों को पंख देने की शुरुआत है, जो अपनी आंखों में स्टेथोस्कोप और सफेद कोट का सपना संजोए बैठे हैं।

तैयारियों का जायजा और डीसी की दो टूक

जैसे ही केंद्र सरकार की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की हरी झंडी मिली, जिला प्रशासन की हलचल अचानक बढ़ गई है। बीते दिनों रेवाड़ी के उपायुक्त ने अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। बैठक का माहौल गंभीर था क्योंकि लक्ष्य बड़ा है और समय कम।

डीसी ने साफ शब्दों में कह दिया है कि पहली क्लास बैठने से पहले हर छोटी-बड़ी व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए। चाहे वह क्लासरूम की बेंच हो या हॉस्टल की छत, हर काम में बारीकी और गुणवत्ता की मांग की गई है।

अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी। यह प्रोजेक्ट रेवाड़ी की साख से जुड़ा है इसलिए पाइपलाइन बिछाने से लेकर बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने तक हर विभाग को आपसी तालमेल के साथ कदम बढ़ाने होंगे।

50 सीटों से होगी नींव की शुरुआत

शुरुआती दौर में केंद्र सरकार ने रेवाड़ी एम्स के लिए एमबीबीएस की 50 सीटें आवंटित की हैं। संख्या भले ही अभी छोटी लगे, लेकिन इसका प्रभाव बहुत गहरा होने वाला है।

जब स्थानीय स्तर पर भविष्य के डॉक्टर तैयार होंगे, तो न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर भी नई ऊंचाइयों को छुएगा।

प्रशासन का पूरा जोर फिलहाल इस बात पर है कि बाहर से आने वाले छात्रों को हॉस्टल और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना न पड़े।

सड़क और सुविधाओं का जाल

एम्स तक पहुंचना भी अब और आसान होगा। नेशनल हाईवे से एम्स परिसर तक ट्रैफिक की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों का जाल समय रहते बिछा दिया जाए ताकि जब सत्र शुरू हो, तो धूल और मलबे की जगह एक व्यवस्थित परिसर छात्रों का स्वागत करे।

पानी की सप्लाई और बिजली के कनेक्शन को लेकर भी डेडलाइन तय कर दी गई है।

माजरा भालखी का यह एम्स आने वाले समय में केवल रेवाड़ी ही नहीं, बल्कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों और आसपास के पूरे इलाके के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण साबित होगा।

लोगों को अब छोटी-छोटी बीमारियों या गंभीर इलाज के लिए दिल्ली या रोहतक की ओर टकटकी नहीं लगानी पड़ेगी। यह एक नए युग की शुरुआत है, जिसकी नींव अब मजबूती से रखी जा चुकी है।

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नमस्कार! मेरा नाम विनोद यादव है और मैंने कृषि और टेक्सटाइल विषय के साथ में बी-टेक किया है। मौजूदा समय में एक जर्मनी बेस्ड टेक्सटिल कंपनी में प्रोडक्शन हेड के तौर पर कार्य कर रहा हूँ और साथ में कृषि के कार्यों को देखता हूँ। किसान परिवार में पैदा होने के चलते कृषि से शुरू से ही एक अलग प्रकार का जुड़ाव रहा है। रोजाना यहां हरियाणा से जुड़ी और हरियाणा प्रदेश के किसानों से जुड़ी ख़बरों को अपडेट करता हूँ।
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