खरीफ फसलों की बुवाई 84 लाख हेक्टेयर के पार, पिछले साल के मुकाबले क्षेत्रफल में हल्की कमी

देश में खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 84 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंच गया है। हालांकि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कुल क्षेत्रफल में 3.44 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी दर्ज की गई है।

Kharif Crops Update: देश में खरीफ सीजन की बुवाई रफ्तार पकड़ रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 12 जून तक विभिन्न खरीफ फसलों का कुल रकबा 84 लाख हेक्टेयर से अधिक दर्ज किया गया है। हालांकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले बुवाई क्षेत्र में 3.44 लाख हेक्टेयर की हल्की कमी देखने को मिली है।

मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी बताती है कि किसानों ने इस सीजन में सबसे अधिक क्षेत्र में गन्ने की खेती की है। वहीं कपास, धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई भी कई राज्यों में आगे बढ़ रही है।

गन्ना सबसे आगे, कपास की बुवाई भी तेज

आंकड़ों के मुताबिक गन्ने की खेती 54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में की गई है। इसके बाद कपास की बुवाई 9 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में दर्ज की गई है।

जूट और मेस्टा (Jute and Mesta) फसलों का रकबा भी 6 लाख हेक्टेयर से अधिक रहा है। ये फसलें विशेष रूप से पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

धान, दलहन और श्री अन्न की स्थिति

धान (Rice) की बुवाई लगभग 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है। वहीं दलहन (Pulses) की खेती 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में की गई है।

मंत्रालय के अनुसार श्री अन्न (Shri Anna) और मोटे अनाज (Coarse Cereals) का रकबा 4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रहा है। हाल के वर्षों में पोषण और जल संरक्षण के दृष्टिकोण से इन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

तिलहन फसलों का रकबा 3 लाख हेक्टेयर से अधिक

तिलहन (Oilseeds) फसलों की बुवाई भी जारी है और अब तक इनका कुल क्षेत्रफल 3 लाख हेक्टेयर से अधिक दर्ज किया गया है। मानसून की प्रगति के साथ आने वाले हफ्तों में बुवाई का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

हालांकि कुल बुवाई क्षेत्र पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कुछ कम है, लेकिन प्रमुख खरीफ फसलों में किसानों की सक्रियता बनी हुई है। आगामी सप्ताहों में बारिश की स्थिति और राज्यों में बुवाई की गति पर आगे के आंकड़े निर्भर करेंगे।

लेखक के बारे में
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Vinod Yadav

नमस्कार! मेरा नाम विनोद यादव है और मैंने कृषि और टेक्सटाइल विषय के साथ में बी-टेक किया है। मौजूदा समय में एक जर्मनी बेस्ड टेक्सटिल कंपनी में प्रोडक्शन हेड के तौर पर कार्य कर रहा हूँ और साथ में कृषि के कार्यों को देखता हूँ। किसान परिवार में पैदा होने के चलते कृषि से शुरू से ही एक अलग प्रकार का जुड़ाव रहा है। रोजाना यहां हरियाणा से जुड़ी और हरियाणा प्रदेश के किसानों से जुड़ी ख़बरों को अपडेट करता हूँ।

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