Haryana AgriStack: 1.75 करोड़ कृषि भूखंडों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार, 8.32 लाख किसानों को मिली किसान आईडी
Haryana News: हरियाणा में कृषि क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के एग्रीस्टैक (AgriStack) कार्यक्रम के तहत प्रदेश के करीब 1.75 करोड़ कृषि भूखंडों (Agri Plots) की जियो-रैफरेंसिंग (Geo-Referencing) पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही राज्य के लगभग 96 प्रतिशत गांवों का डिजिटल मानचित्रण (Digital Mapping) भी पूरा हो गया है।
इस डिजिटल अभियान का असर अब किसानों तक भी पहुंचने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 8.32 लाख से अधिक किसानों की विशिष्ट किसान आईडी (Farmer ID) तैयार की जा चुकी है। इसका उद्देश्य किसानों की भूमि, फसल और व्यक्तिगत रिकॉर्ड को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर सरकारी सेवाओं और योजनाओं की पहुंच को आसान बनाना है।
संचालन समिति की बैठक में हुई प्रगति की समीक्षा
एग्रीस्टैक कार्यक्रम की संचालन समिति की बैठक मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान कहा गया कि यह पहल केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं है बल्कि कृषि प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने और किसानों से जुड़ी सूचनाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किसानों को क्या होंगे फायदे
एग्रीस्टैक प्रणाली के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद किसानों को मिलने वाली सब्सिडी, मुआवजा और अन्य वित्तीय सहायता अधिक तेजी से उनके खातों तक पहुंचाई जा सकेगी।
साथ ही एक ही भूमि या फसल के आधार पर बार-बार लाभ लेने जैसी गड़बड़ियों को रोकने में भी मदद मिलेगी। सरकार के पास सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध होने से भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा और लाभ सही पात्र किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा।
7,100 में से 6,808 गांवों का काम पूरा
समीक्षा बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के कुल 7,100 गांवों में से 6,808 गांवों की जियो-रैफरेंसिंग पूरी हो चुकी है। यह कुल गांवों का 95.89 प्रतिशत हिस्सा है।
अधिकारियों के अनुसार शेष गांवों को भी अगले दो महीनों के भीतर इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाएगा। इसके बाद पूरे प्रदेश का डिजिटल कृषि मानचित्र तैयार हो जाएगा।
किसान रजिस्ट्री बनाने में CSC नेटवर्क की भूमिका
राजस्व विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि डिजिटल मैपिंग के आधार पर प्रमाणित किसान रजिस्ट्री (Farmer Registry) तैयार की जा रही है।
पंजीकरण प्रक्रिया को तेज करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) नेटवर्क को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएससी की भागीदारी बढ़ने से किसानों के पंजीकरण की गति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
अगस्त 2026 से शुरू होगा डिजिटल फसल सर्वेक्षण
बैठक में खरीफ 2026 के डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। यह सर्वेक्षण हरियाणा के सभी 23 जिलों में जियो-रैफरेंस किए गए प्रत्येक कृषि भूखंड को कवर करेगा।
इस कार्य को समयबद्ध और सटीक तरीके से पूरा करने के लिए लगभग 6,500 प्रशिक्षित सर्वेक्षकों की टीम तैनात की जाएगी। सर्वेक्षण के अगस्त 2026 से शुरू होने की संभावना है।
अधिकारियों के अनुसार राजस्व विभाग के मौजूदा लगभग 1.75 करोड़ भूमि रिकॉर्ड का मिलान इस डिजिटल फसल सर्वेक्षण से किया जाएगा। इसके बाद किसान रजिस्ट्री और अधिक व्यापक तथा त्रुटिहीन बनेगी, जिससे भविष्य में किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया और मजबूत हो सकेगी।



