पूर्वोत्तर भारत बन सकता है देश की अगली विकास शक्ति, मेघालय में शुरू हुआ सबसे बड़ा ऑर्गेनिक मसाला प्रसंस्करण संयंत्र
Organic Spice Plant: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत आने वाले वर्षों में देश की विकास यात्रा का प्रमुख केंद्र बन सकता है। उनका कहना है कि ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming), टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) और उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों के क्षेत्र में मौजूद संभावनाएं इस क्षेत्र को नई पहचान दिला सकती हैं।
मेघालय के री-भोई जिले के भोइरिमबोंग में पूर्वोत्तर के सबसे बड़े ऑर्गेनिक मसाला प्रसंस्करण संयंत्र (Organic Spice Processing Plant) के उद्घाटन के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि का भविष्य केवल अधिक उत्पादन में नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता (Traceability) और उपभोक्ताओं के भरोसे में छिपा है।
किसानों को मिलेगा मूल्य संवर्धन का लाभ
ईस्टर्न री-भोई ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा स्थापित इस नई इकाई से क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह संयंत्र लाकाडोंग हल्दी, अदरक और काली मिर्च जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन (Value Addition) और बाजार तक पहुंच को मजबूत करने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा कि भविष्य उन लोगों का है जो सबसे अधिक नहीं, बल्कि सबसे बेहतर उत्पादन करते हैं। उनके अनुसार साफ-सुथरे, भरोसेमंद और प्रीमियम गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
वैश्विक बाजार में बढ़ रही ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग
वित्त मंत्री ने कहा कि मेघालय को एक विशेष बढ़त हासिल है क्योंकि दुनिया भर में पर्यावरण के अनुकूल और नैतिक तरीके से तैयार किए गए खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब भरोसा एक महत्वपूर्ण मूल्य बन चुका है।
उनके अनुसार मेघालय की पारंपरिक खेती, सामुदायिक कृषि व्यवस्था और प्राकृतिक विरासत इस बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में राज्य को मजबूत स्थिति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां भरोसे की अपनी कीमत है और मेघालय के पास यह भरोसा प्रकृति और पीढ़ियों से संचित पर्यावरणीय समझ के रूप में मौजूद है।
विकास और पर्यावरण साथ-साथ चलें
सीतारमण ने आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व बना रहे।
उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब देश का हर क्षेत्र इस यात्रा में भागीदारी करे। इस लक्ष्य को हासिल करने में पूर्वोत्तर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
महिला किसानों और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने की बात
वित्त मंत्री ने किसानों, खासकर महिला किसानों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मूल्य संवर्धन, मजबूत उत्पादक संगठनों और वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच को जरूरी बताया।
उनका कहना था कि इन प्रयासों से पूर्वोत्तर के ऑर्गेनिक उत्पादों के आसपास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले ब्रांड विकसित किए जा सकते हैं जिससे किसानों की आय बढ़ाने और क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।



