बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद बिखर गई TMC! कांग्रेस में विलय को तैयार ममता बनर्जी, पर अभिषेक बनर्जी की इस बड़ी मांग से फंसा पेंच

TMC Congress Merger: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान और बड़े पैमाने पर हुई बगावत के बाद अब टीएमसी का वजूद खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बेहद चौंकाने वाला उलटफेर होने जा रहा है जहां ममता बनर्जी अपनी पार्टी टीएमसी का कांग्रेस में विलय करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गई हैं।

दरअसल चुनाव नतीजों के तुरंत बाद टीएमसी दो फाड़ हो गई। विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में करीब 58 विधायकों ने ममता बनर्जी से नाता तोड़ लिया और स्पीकर को पत्र सौंपकर ऋतब्रत को नेता विपक्ष भी घोषित करवा दिया। विधायकों की इस बगावत की आग यहीं नहीं थमी और जल्द ही इसने संसद को भी अपनी चपेट में ले लिया।

राज्यसभा से सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे कद्दावर नेताओं ने इस्तीफा दे दिया तो वहीं लोकसभा में ममता की बेहद करीबी रहीं काकोली घोष के नेतृत्व में 20 से ज्यादा सांसदों ने खुला विद्रोह कर दिया। इस बागी गुट में सायोनी घोष का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

चौतरफा बगावत से घिरीं ममता बनर्जी को संभालने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने हाथ आगे बढ़ाया है। दिल्ली में बैठकों का दौर बेहद गर्म है। इसी सिलसिले में ममता बनर्जी ने 10 जनपथ जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात की।

डील और दांव का पूरा समीकरण

सूत्रों के हवाले से खबर है कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी के सामने विलय का प्रस्ताव रखते हुए उन्हें नई पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस महासचिव बनाने का ऑफर दिया है। ममता बनर्जी इस विलय के लिए तैयार भी दिख रही हैं लेकिन असली पेंच अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की मुलाकात में फंस गया है।

अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में कांग्रेस के सामने बेहद भारी शर्तें रख दी हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मल्लिकार्जुन खरगे का कद मांगते हुए मांग की है कि विलय के बाद ममता बनर्जी को राज्यसभा भेजा जाए और उन्हें वहां नेता विपक्ष (LoP) का पद दिया जाए जो वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास है।

अभिषेक बनर्जी की इस महत्वाकांक्षी मांग के बाद कांग्रेस नेतृत्व सोच में पड़ गया है। हालांकि ममता बनर्जी ने इस पूरे फॉर्मूले और प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कांग्रेस से कुछ दिनों का समय मांगा है लेकिन इस उठापटक ने देश की सियासत में भारी हलचल पैदा कर दी है।

टीएमसी में बगावत और विलय की शर्तों का पूरा खाका

  • विधायकों की बगावत: 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुना।

  • सांसदों का विद्रोह: लोकसभा में काकोली घोष के नेतृत्व में 20 से अधिक सांसदों ने नाता तोड़ा।

  • कांग्रेस का पहला ऑफर: ममता बनर्जी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव का पद।

  • अभिषेक बनर्जी की नई शर्त: ममता बनर्जी को राज्यसभा भेजकर मल्लिकार्जुन खरगे की जगह राज्यसभा में नेता विपक्ष (LoP) बनाने की मांग।

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