नई दिल्ली, 26 सितंबर। देश में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर जारी विवाद के बीच शनिवार को तीनों चुनाव आयुक्तों की एक बेहद अहम बैठक हुई। इस बैठक के बाद चुनाव आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही अंदरूनी खींचतान की खबरों को खारिज करते हुए इसे 'सामान्य संस्थागत प्रक्रिया' बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से खबरें आ रही थीं कि चुनाव आयोग में वोटर लिस्ट से नाम हटाने, नए पंजीकरण और डेटाबेस के विकेंद्रीकरण को लेकर शीर्ष स्तर पर गहरे मतभेद हैं। इसके बाद शनिवार को हुई इस बैठक में सभी विवादित बिंदुओं पर चर्चा की गई। आयोग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बिहार, असम सहित देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के आदेश पूरी तरह से तीनों आयुक्तों की आपसी सहमति के बाद ही जारी किए गए हैं।

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क्या है पूरा विवाद और आपत्तियां

मीडिया में आई कुछ खोजी रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कामकाज और फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आरोप था कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में बदलाव और डिजिटल वोटर रिकॉर्ड के केंद्रीकरण जैसे बड़े फैसले बिना उचित बहुमत या जानकारी के लिए जा रहे थे। विपक्ष ने इन खबरों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक की मांग कर दी थी और आरोप लगाया था कि मतदाता सूचियों में हेरफेर की कोशिश की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की मुहर और आयोग की दलील

इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 में जो बदलाव किए गए थे, उन्हें देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी वैध ठहराया है। आयोग का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था के भीतर अलग-अलग राय या विचार होना एक स्वस्थ प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन जब अंतिम आदेश जारी होता है, तो वह पूरी तरह से सामूहिक और सर्वसम्मत होता है।

आम लोगों और वोटरों पर क्या होगा असर

हरियाणा (रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल) और राजस्थान के उन लाखों नागरिकों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है जो आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने या सुधार करवाने की प्रक्रिया में शामिल हैं। आयोग के इस रुख से साफ है कि वर्तमान में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। आम वोटरों को घबराने की ज़रूरत नहीं है, बशर्ते वे आधिकारिक ईसीआई (ECI) पोर्टल के जरिए अपने नाम और पते की जांच सही समय पर कर लें। फर्जी या दोहरे वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया सख्त नियमों के तहत जारी रहेगी।

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राजनीतिक पारा चढ़ने के आसार

चुनाव आयोग की इस सफाई को विपक्षी दलों ने महज 'डैमेज कंट्रोल' (नुकसान की भरपाई) करार दिया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने आगामी 30 सितंबर को एक बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों की सुरक्षा को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने की उम्मीद है।