Haryana News Today: हरियाणा के सिरसा जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस जिला डबवाली में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच खुद रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आने लगे हैं।
नशा तस्करों से कथित तौर पर सांठगांठ रखने, व्यापारियों से जबरन वसूली करने और भ्रष्टाचार के संगीन मामलों में घिरे दो सीआईए (CIA) प्रभारियों समेत छह पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है।
इस पूरे मामले का खुलासा कुछ कथित ऑडियो और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आने के बाद हुआ, जिसके बाद महकमे में हड़कंप मच गया है।
हैरानी की बात यह है कि जिन कंधों पर डबवाली पुलिस जिले को पूरी तरह नशामुक्त बनाने की बड़ी जिम्मेदारी थी वही अब कटघरे में खड़े हैं। पहले तो दागदार छवि वाले इन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का आनन-फानन में अन्य जिलों में तबादला किया गया था लेकिन जैसे-जैसे सबूत पुख्ता हुए, विभाग ने निलंबन की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे दिया।
डबवाली की एसपी जसलीन कौर ने इन सभी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किए जाने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि मामलों की गहनता से विभागीय जांच की जा रही है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।
सीआईए प्रभारियों पर गिरी गाज
इस पूरे घटनाक्रम में पहला और सबसे बड़ा एक्शन तत्कालीन सीआईए डबवाली प्रभारी सब-इंस्पेक्टर (SI) राजपाल पर हुआ है। उन पर सीधे तौर पर नशा तस्करों के साथ संबंध रखने के गंभीर आरोप लगे हैं जो पुलिसिया साख पर बड़ा धब्बा है। डीएसपी कालांवाली द्वारा आरोप पत्र जारी किए जाने के बाद राजपाल का तबादला जींद कर दिया गया था जहां अब उन्हें सस्पेंड कर मामले की आगे की कमान जींद पुलिस को सौंप दी गई है।
वहीं एक अन्य मामले में हिसार रेंज के आईजी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईए कालांवाली के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर सुरेश, एवीटी (AVT) स्टाफ डबवाली के हवलदार रमेश, एएसआई (ASI) राजेंद्र मूंढ और सीआईए डबवाली के एएसआई बलवान को भी सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा एएसआई मदन लाल को लाइन हाजिर किया गया है।
मेडिकल संचालक से वसूली, पुलिसकर्मी पहुंचे जेल
खाकी की धौंस दिखाकर अवैध वसूली का एक और शर्मनाक मामला गांव जोगेवाला से सामने आया है। यहाँ एक मेडिकल स्टोर संचालक से जबरन डरा-धमकाकर पैसे वसूलने के आरोप पुलिसकर्मियों पर लगे हैं।
बताया जा रहा है कि सिटी डबवाली में तैनात सुरक्षा अभिकर्ता इंद्रपाल ने होमगार्ड वीरपाल के साथ मिलकर एक मेडिकल संचालक से दो हजार रुपये की जबरन वसूली की थी।
इस मामले को भ्रष्टाचार की श्रेणी में रखते हुए पुलिस ने अपने ही कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। दोनों आरोपियों को डीएसपी ने अदालत में पेश किया जहां से उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस महकमे के भीतर मची इस उथल-पुथल ने आम जनता के बीच सुरक्षा तंत्र को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।




