अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मानसून के अंतिम दौर और उमस व गर्मी के अचानक बढ़ने के कारण रिहायशी इलाकों, खेतों और जंगलों में सांपों के निकलने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। इस उभरते हुए खतरे को भांपते हुए अल्मोड़ा जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरीश पंत ने आम जनता की सुरक्षा के लिए एक विस्तृत और बेहद संवेदनशील स्वास्थ्य एडवाइजरी (Health Advisory) जारी की है।

सीएमओ ने साफ शब्दों में रेखांकित किया है कि सांप का काटना कोई सामान्य बात नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर और संवेदनशील 'चिकित्सकीय आपातस्थिति' (Medical Emergency) है। यदि पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी अड़चन के सही समय पर उचित डॉक्टरी इलाज मुहैया करा दिया जाए, तो उसकी जान शत-प्रतिशत बचाई जा सकती है। उन्होंने लोगों से अंधविश्वासों से दूर रहने और सीधे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की ओर रुख करने का कड़ा आह्वान किया है।

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खेत और जंगल जाते समय बरते यह विशेष सावधानी

पहाड़ी क्षेत्रों में दैनिक गतिविधियों के दौरान सांपों के साथ होने वाले आमने-सामने के टकराव को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ अत्यंत व्यावहारिक सुरक्षा उपाय सुझाए हैं:

  • टॉर्च का प्रयोग अनिवार्य: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के निवासियों से अपील की गई है कि वे रात के अंधेरे में या धुंधले समय बाहर निकलते वक्त अनिवार्य रूप से टॉर्च या मोबाइल फ्लैशलाइट का उपयोग करें।
  • गमबूट और सुरक्षा गियर: किसानों और घास-लकड़ी लेने जंगल जाने वाले श्रमिकों को सलाह दी गई है कि वे नंगे पैर या सामान्य चप्पल पहनने के बजाय मोटे चमड़े के जूते या घुटनों तक आने वाले रबर के गमबूट (Gumboots) पहनकर ही जाएं।
  • परिसर की साफ-सफाई: घरों के ठीक आसपास उगी हुई झाड़ियों, कबाड़, ईंट-पह्रों के पुराने ढेरों और सूखी लकड़ियों के स्टॉक्स को तुरंत साफ करने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि ये स्थान सांपों के छिपने और अंडे देने के लिए सबसे अनुकूल प्राकृतिक आश्रय स्थल बन जाते हैं।

सांप दिखे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश कतई न करें

अकसर देखा जाता है कि घरों या खेतों में सांप निकलने पर लोग घबरा जाते हैं और उसे खुद लाठी-डंडों से मारने या किसी अनाड़ी व्यक्ति के माध्यम से पकड़ने का जोखिम उठाते हैं। सीएमओ डॉ. हरीश पंत ने इस खतरनाक प्रवृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी सांप तब तक हमला नहीं करता जब तक कि उसे खुद की जान को खतरा महसूस न हो।

सांप को घेरने या छेड़ने की स्थिति में उसके दोबारा और अत्यधिक आक्रामक तरीके से डसने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग की रेस्क्यू टीम या स्थानीय मान्यता प्राप्त स्नेक कैचर्स को ही सूचित किया जाना चाहिए ताकि वन्यजीव और इंसानों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं, यह प्राथमिक उपचार है जरूरी

यदि किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है, तो सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम यह है कि पीड़ित को मानसिक रूप से शांत रखा जाए। घबराहट और अत्यधिक डर के कारण मानव शरीर में रक्तचाप (Blood Pressure) और दिल की धड़कन (Heart Rate) तेजी से बढ़ जाती है, जिससे यदि सांप जहरीला हो, तो उसका विष रक्त संचार के माध्यम से पूरे शरीर और मस्तिष्क तक बहुत तेजी से फैलने लगता है।

पीड़ित को तुरंत आराम की मुद्रा में सीधा लिटा दिया जाना चाहिए और प्रभावित अंग (हाथ या पैर) को बिना किसी अनावश्यक हलचल के पूरी तरह से स्थिर (Immobilize) कर देना चाहिए। अंग को स्थिर रखने के लिए किसी चौड़ी पट्टी या लकड़ी के तख्ते का स्प्लिंट के रूप में सहारा लिया जा सकता है।

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घाव पर चीरा लगाना और जहर चूसना पड़ सकता है जान पर भारी

पुरानी फिल्मों और पारंपरिक भ्रांतियों के चलते लोग आज भी सर्पदंश के स्थान पर ब्लेड या चाकू से चीरा लगाकर खून बहाने, मुंह से जहर चूसकर बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। डॉ. पंत ने इन सभी अमानवीय और अवैज्ञानिक तौर-तरीकों को पूरी तरह से प्रतिबंधित और जानलेवा करार दिया है।

घाव पर कट लगाने से संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ जाता है और अंदरूनी नसें पूरी तरह डैमेज हो सकती हैं। वहीं, मुंह से जहर चूसने वाले व्यक्ति की जान को भी मुंह के छालों या मसूड़ों के जरिए जहर फैलने का सीधा खतरा रहता है। इसके अतिरिक्त, घाव के ठीक ऊपर किसी रस्सी या कपड़े को अत्यधिक कसकर (Tourniquet) बांधने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे उस हिस्से का रक्त प्रवाह पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे बाद में उस अंग को काटने तक की नौबत आ सकती है।

झाड़-फूंक में न गंवाएं कीमती समय, एंटी-वेनम ही एकमात्र इलाज

एडवाइजरी के अंत में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पहाड़ों में प्रचलित झाड़-फूंक, तांत्रिक क्रियाओं और जड़ी-बूटी के घरेलू इलाज पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और उत्तराखंड में पाए जाने वाले सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं, लेकिन तांत्रिक अक्सर गैर-जहरीले सांपों के मामलों का फायदा उठाकर अपनी झूठी वाहवाही लूटते हैं।

यदि सांप कोबरा या करैत जैसी अत्यधिक जहरीली प्रजाति का हो, तो झाड़-फूंक में गंवाया गया एक-एक मिनट मरीज को मौत के मुंह में धकेलता है। सर्पदंश का एकमात्र वैज्ञानिक और प्रमाणित इलाज एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom - ASV) का इंजेक्शन ही है। अल्मोड़ा जिले के सभी जिला नागरिक अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की दवाइयां और प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम हर समय तैनात है, जहां यह इलाज पूरी तरह निशुल्क और सुरक्षित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है।