अली लारीजानी बने ईरान के नए 'पावर सेंटर', खामेनेई की मौत के बाद परमाणु युद्ध का खतरा?
ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अली लारीजानी ने कमान संभाल ली है। एक अस्थाई परिषद के जरिए देश चलाने और परमाणु नीति पर बड़े फैसले लेने की तैयारी है। जानिए क्या होगा ईरान का अगला कदम।
तेहरान/दुबई: मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक भीषण हवाई हमले में मौत के बाद देश में सत्ता का वैक्यूम (Power Vacuum) पैदा हो गया है।
इस आपातकालीन स्थिति के बीच, ईरान के कद्दावर और चतुर राजनीतिज्ञ अली लारीजानी (Ali Larijani) एक बार फिर सबसे शक्तिशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं।
उन्होंने घोषणा की है कि देश को संभालने के लिए एक 'अस्थाई नेतृत्व परिषद' (Temporary Leadership Council) का गठन किया जाएगा।
यह बदलाव तब हुआ है जब ईरान अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तरफ इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध जैसी स्थिति है तो दूसरी तरफ आंतरिक विद्रोह की आग।
लारीजानी, जिन्हें खामेनेई का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार (Strategist) माना जाता है अब परमाणु वार्ता से लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा तक का पूरा पोर्टफोलियो संभाल रहे हैं।
कौन हैं अली लारीजानी? संकटमोचक या सख्त प्रशासक?
लारीजानी का उभार अचानक नहीं है। पिछले साल से ही वे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था (Security Hierarchy) में शीर्ष पर थे। अगस्त में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के सचिव के रूप में उनकी नियुक्ति ने ही साफ कर दिया था कि वे खामेनेई की 'गुड बुक्स' में हैं।
वे एक ऐसे नेता हैं जिनके पास कूटनीति (Diplomacy) का लंबा अनुभव है लेकिन उन पर घरेलू विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने के गंभीर आरोप भी हैं।
परमाणु डील: 'मोती के बदले कैंडी' वाली नीति?
लारीजानी का एक पुराना बयान आज भी चर्चा में है जब उन्होंने यूरोपीय देशों के प्रस्तावों को "एक मोती के बदले कैंडी बार" (A pearl for a candy bar) देने जैसा बताया था।
हालांकि हाल ही में उनके सुर थोड़े नरम दिखे थे। ओमान में हुई गुप्त वार्ताओं के दौरान उन्होंने संकेत दिया था कि अगर अमेरिका की चिंता सिर्फ परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) है, तो इस मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है।
लेकिन अब खामेनेई की मौत और सैन्य प्रमुख अब्दोलरहीम मौसवी की हत्या के बाद क्या लारीजानी शांति का रास्ता चुनेंगे या बदले की आग में परमाणु कार्यक्रम को और तेज करेंगे?
रूस और चीन के साथ गहरी दोस्ती
लारीजानी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने ही चीन के साथ 25 साल के सहयोग समझौते (Cooperation Agreement) की नींव रखी थी।
साथ ही मॉस्को की उनकी बार-बार की यात्राएं दिखाती हैं कि पुतिन के साथ उनके संबंध कितने प्रगाढ़ हैं। अमेरिका के दबाव को बेअसर करने के लिए वे रूस को एक बड़े 'काउंटर-वेट' के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।



