Iran News: अयातुल्ला खमेनेई की मौत के बाद ईरान में भारी तनाव, कहीं मातम तो कहीं जश्न; क्या गिर जाएगी सरकार?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई की मौत ने देश को दो हिस्सों में बांट दिया है। सरकारी समर्थक जहां मातम मना रहे हैं और बदले की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रदर्शनकारी सड़कों पर जश्न मनाकर बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
तेहरान/दुबई: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई (Supreme Leader) के 36 साल लंबे शासन का अंत एक नाटकीय और रक्तरंजित मोड़ पर हुआ है।
शनिवार को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि के बाद पूरा ईरान दो ध्रुवों में बंट गया है।
जहां एक ओर सरकारी टेलीविजन पर एंकर रुंधे गले से इस 'शहादत' की खबर सुना रहे थे वहीं दूसरी ओर ईरान की गलियों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दशकों पुराने दमन (Suppression) के खिलाफ उपजे गुस्से को बयां कर रही हैं।
सड़कों पर सन्नाटा और सुलगता आक्रोश
तेहरान के मुख्य चौराहों पर काले कपड़ों में लिपटे समर्थकों की भारी भीड़ जमा है जो अपने नेता की मौत पर विलाप (Mourning) कर रहे हैं। लेकिन राजधानी से दूर करज, इजेह और देहलोरन जैसे शहरों से आ रहे वीडियो एक अलग ही कहानी कह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज में लोग सड़कों पर नाचते और आतिशबाजी करते देखे जा सकते हैं। देहलोरन में खमेनेई की प्रतिमा को गिरा दिया गया जो सीधे तौर पर सत्ता को चुनौती देने जैसा है।
'क्या मैं सपना देख रहा हूं?'
दक्षिण ईरान के गल्लेह दार कस्बे में 1979 की इस्लामी क्रांति के संस्थापक अयातुल्ला खुमैनी के स्मारक को ढहा दिया गया।
एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को चिल्लाते हुए सुना गया, "क्या मैं सपना देख रहा हूं? नई दुनिया को मेरा सलाम!" यह उत्साह उस गहरी खाई को दर्शाता है जो ईरानी शासन और वहां की युवा आबादी के बीच पैदा हो चुकी है।
विशेष रूप से उन परिवारों में खुशी का माहौल है जिन्होंने हालिया विरोध प्रदर्शनों (Protests) में अपने बच्चों को खोया था।
बदले की आग और अनिश्चित भविष्य
ईरान के भीतर एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो इस हमले को अपनी संप्रभुता (Sovereignty) पर प्रहार मान रहा है। मशहद के एक छात्र हुसैन दादबख्श ने कहा, "इजरायल और ट्रंप को इस शहादत की भारी कीमत चुकानी होगी।"
वहीं शिराज की एक शिक्षिका अतुसा मिर्जादे ने डर जताते हुए कहा कि वह खमेनेई की समर्थक नहीं हैं, लेकिन विदेशी हमले से देश में इराक जैसी अराजकता (Chaos) आने का डर उन्हें सता रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद ईरानी जनता से इस मौके का फायदा उठाकर अपनी सरकार पलटने का आह्वान किया है।
अब सवाल यह है कि क्या खमेनेई की मौत ईरान में लोकतंत्र का द्वार खोलेगी या यह मुल्क एक भयानक गृहयुद्ध की ओर बढ़ जाएगा?



