Firozabad News: कहते हैं कि बच्चे ईश्वर का रूप होते हैं लेकिन जब कोई इंसान हैवानियत की सारी हदें पार कर जाए तो वह भगवान के उसी रूप को भी नहीं बख्शता।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से दिल को दहला देने वाली एक ऐसी ही घटना सामने आई है जिसने न सिर्फ एक मां की गोद सूनी कर दी बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है।
शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में शनिवार की दोपहर जो कुछ भी हुआ वह किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखों में आंसू ला देने के लिए काफी है।
सनक का वो खौफनाक आधा मिनट: CCTV में कैद हुई हैवानियत
शिकोहाबाद थाना क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे वक्त जैसे ठहर गया। 18 महीने का नन्हा आरव जो अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीखा था अपनी मां रति देवी के साथ अपनी मौसी के घर आया हुआ था।
परिवार अपने कुछ पुराने कानूनी विवादों को सुलझाने में मसरूफ था। इसी बीच वहां एंट्री होती है बदायूं के शेखूपुर निवासी 24 वर्षीय विराज उर्फ जितेंद्र पाठक की। जितेंद्र रिश्ते में रति के पति का देवर लगता था।
कोई नहीं जानता था कि मदद का मुखौटा पहनकर आया यह शख्स अपने भीतर कितनी गहरी नफरत और सनक छिपाए बैठा है। दोपहर के समय उसने आरव को गोद में उठाया और कहा “चलो बेटा, तुम्हें टॉफी दिलाकर लाता हूँ।” मासूम आरव भी उसकी बातों में आकर मुस्कुराते हुए चला गया। लेकिन घर से महज 50 मीटर की दूरी पर जाते ही जितेंद्र का असली चेहरा सामने आ गया।
गली के एक सुनसान कोने में लगे सीसीटीवी कैमरे में जो फुटेज कैद हुई, उसे देखना भी कलेजा चीर देने जैसा है। महज 34 सेकंड के भीतर उस दरिंदे ने 18 महीने के बच्चे को एक के बाद एक कुल 8 बार पूरी ताकत से पक्की सड़क पर पटका।
मासूम का सिर बार-बार कंक्रीट से टकराता रहा और उसकी नन्ही देह तड़पती रही। वारदात को अंजाम देकर आरोपी बच्चे के अधमरे शरीर को वापस घर के बाहर फेंककर फरार हो गया।
मां की चीख और वो आखिरी 10 मिनट
जब करीब 10 मिनट बाद परिवार की नजर बाहर पड़ी, तो आरव लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ा था। उसकी सांसें उखड़ रही थीं।
मां रति देवी बदहवास हालत में बच्चे को लेकर अस्पताल की तरफ भागीं लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने आरव को मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि सिर में लगी गंभीर चोटों और अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई थी।
रोती-बिलखती मां रति ने रुंधे गले से बताया “मेरा बच्चा तो अभी ठीक से मम्मी कहना भी नहीं सीख पाया था। वो रिश्ता जोड़कर आया था, हमने तो उस पर भरोसा किया था… मुझे क्या पता था कि वो मेरे बच्चे की जान ले लेगा।”
शादी से इनकार बना मौत की वजह
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश और आरोपी के कबूलनामे ने इस पूरी घटना के पीछे की खौफनाक वजह को उजागर किया है।
जितेंद्र पिछले काफी समय से रति पर शादी करने का दबाव बना रहा था। चूंकि रति पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा था, इसलिए उसने साफ तौर पर इस एकतरफा प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
जितेंद्र के दिमाग में यह सनक बैठ चुकी थी कि डेढ़ साल का आरव ही उसकी और रति की शादी के बीच की सबसे बड़ी रुकावट है। इसी रुकावट को रास्ते से हटाने के लिए उसने इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की साजिश रची।
एनकाउंटर के बाद दबोचा गया कातिल
वारदात की गंभीरता को देखते हुए फिरोजाबाद पुलिस तुरंत एक्शन में आई। एसपी सिटी रवि शंकर प्रसाद के निर्देश पर चार अलग-अलग टीमों ने आरोपी की तलाश शुरू की।
बदायूं-मैनपुरी बॉर्डर के पास जब पुलिस ने घेराबंदी की तो आरोपी जितेंद्र ने खुद को घिरा देख पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।
जवाबी कार्रवाई में पुलिस की एक गोली जितेंद्र के पैर में लगी जिसके बाद उसे दबोच लिया गया।
पुलिस ने उसके पास से एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। फिलहाल आरोपी पुलिस की कस्टडी में है और उसका इलाज चल रहा है।
एक तरफा प्यार या सामाजिक मानसिक बीमारी?
यह घटना सिर्फ एक मर्डर केस नहीं है बल्कि यह हमारे समाज के उस खोखलेपन को दर्शाती है जहां एकतरफा चाहत को लोग अपना अधिकार समझ बैठते हैं।
छोटे शहरों और कस्बों में महिलाओं पर इस तरह के अनचाहे दबाव आम बात हो चुके हैं, जहां ना सुनने की आदत न होने के कारण पुरुष इस हद तक हिंसक हो जाते हैं।
सवाल यह भी है कि आखिर कब तक महिलाओं और बच्चों को इस तरह की सनक का शिकार होना पड़ेगा?
प्रशासन ने मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने का भरोसा दिया है लेकिन आरव की मौत ने जो घाव समाज को दिया है उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी।




