IMD Monsoon Forecast 2026: देशभर में भीषण गर्मी और उमस के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मॉनसून को लेकर एक नया और बेहद महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के ताजा मॉडल अनुमानों के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मॉनसून के जून महीने की पांच या छह तारीख के बाद दक्षिण भारत में और मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है।
मौसम के जानकारों का कहना है कि वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर चलने वाली हवाओं का रुख मॉनसून को आगे बढ़ाने और उसे ताकत देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
ऐसे में अगर मॉनसून की रफ्तार में थोड़ी भी देरी होती है तो इसका सीधा असर दक्षिण भारत के राज्यों में होने वाली बारिश की मात्रा और उसके फैलाव पर पड़ सकता है।
हालांकि राहत की बात यह है कि जून के पहले सप्ताह के अंत तक मॉनसूनी गतिविधियों में तेजी आने के आसार हैं जिसके बाद देश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
इस साल देश के किसानों और आम जनता के लिए मौसम विभाग ने एक चिंताजनक चेतावनी भी दी है। आईएमडी के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सीजन के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
मॉनसून के आने की तारीख को लेकर भी मौसम विभाग को अपने पूर्वानुमानों में कई बार बदलाव करना पड़ा है।
शुरुआत में विभाग ने अनुमान लगाया था कि मॉनसून छब्बीस मई के आसपास ही केरल के तट पर दस्तक दे देगा। लेकिन बाद में इस तारीख को आगे बढ़ाते हुए दो जून को मॉनसून के आगमन की बात कही गई थी और अब इसके जून के पहले हफ्ते के बाद रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।
अनेक राज्यों में जारी रहेगा लू का सितम
एक तरफ जहां मॉनसून के आगे बढ़ने का इंतजार हो रहा है वहीं दूसरी तरफ देश का एक बड़ा हिस्सा जून के महीने में भी भीषण गर्मी की चपेट में रहने वाला है।
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि जून के दौरान देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
जिन राज्यों में आने वाले दिनों में लू (हीटवेव) के थपेड़े चलने की आशंका जताई गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को दोपहर के वक्त खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
एल नीनो का दिखेगा कृषि पर असर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल मॉनसून के मिजाज पर एल नीनो का साया साफ तौर पर देखा जा सकता है। एल नीनो के प्रभाव के चलते ही मॉनसूनी हवाओं की रफ्तार और बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है जिसका सीधा असर देश के कुछ हिस्सों में खेती-किसानी और फसलों की बुवाई जैसी कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है।
हालांकि केरल के कुछ हिस्सों में प्री-मॉनसून की बौछारों ने मौसम को थोड़ा सुहावना जरूर बनाया है लेकिन मुख्य मॉनसून देश की मुख्य भूमि पर पूरी तरह से कब सक्रिय होगा इसकी सटीक तारीख की पुष्टि होना अभी बाकी है।
