Fatehabad News: नशे की गिरफ्त से निकलकर मनीष बना मिसाल, पुलिस की मदद से ऐसे बदली 21 साल के युवक की जिंदगी
फतेहाबाद के भिरडाना गांव के मनीष ने नशे को मात देकर फिर से अपना ट्रांसपोर्ट कारोबार संभाल लिया है। एसपी सिद्धांत जैन के मार्गदर्शन में 'ऑपरेशन जीवन ज्योति' के तहत पुलिस ने मनीष की काउंसलिंग कर उसे नई जिंदगी दी है।
फतेहाबाद: हरियाणा के गांवों में पैर पसारते नशे के जाल के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो नाउम्मीदी के अंधेरे में डूबे परिवारों के लिए मशाल बन गई है। यह कहानी है भिरडाना गांव के 21 वर्षीय मनीष की, जिसने न केवल मौत के मुंह से वापसी की, बल्कि आज अपने परिवार के ट्रांसपोर्ट बिजनेस (Transport Business) की कमान संभालकर समाज के सामने एक मिसाल पेश की है।
शुरुआत 'सिर्फ एक घूंट' से, अंजाम बर्बादी तक
मनीष की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है, लेकिन इसकी कड़वाहट असली है। महज 18 साल की उम्र में एक शादी समारोह के दौरान दोस्तों के उकसावे पर पी गई शराब की पहली घूंट ने मनीष को धीरे-धीरे अफीम, चूरा पोस्त और फिर जानलेवा 'चिट्टे' (Synthetic Drug) की गर्त में धकेल दिया। देखते ही देखते हंसता-खेलता परिवार और करोड़ों का कारोबार बिखरने लगा। मनीष खुद को बोझ समझने लगा था और डिप्रेशन (Depression) का शिकार हो गया था। Haryana News
खाकी का मानवीय चेहरा: जब 'ऑपरेशन जीवन ज्योति' ने बदली तकदीर
इस कहानी में टर्निंग पॉइंट (Turning Point) तब आया जब फतेहाबाद पुलिस के 'ऑपरेशन जीवन ज्योति' की टीम भिरडाना पहुंची। एक मां की सिसकियों ने उप-निरीक्षक सुंदर लाल को झकझोर दिया। एसपी सिद्धांत जैन (IPS) के नेतृत्व में पुलिस ने मनीष को अपराधी नहीं, बल्कि एक 'मरीज' की तरह ट्रीट किया। लगातार काउंसलिंग (Counseling), मेडिकल सपोर्ट और पुलिस की निगरानी ने मनीष के भीतर सोए हुए आत्मसम्मान को जगाया। Haryana News
आज 4 ट्रकों का मालिक और खुद सारथी
इलाज और दृढ़ इच्छाशक्ति के बाद मनीष आज पूरी तरह नशामुक्त है। वह न केवल अपने परिवार के 4 ट्रकों का संचालन कर रहा है, बल्कि खुद भी ड्राइविंग करता है। मनीष का कहना है, "नशा आजादी नहीं, बल्कि रूह की गुलामी है।" फतेहाबाद पुलिस की यह 'सेंसिटिव पुलिसिंग' (Sensitive Policing) अब जिले के अन्य युवाओं के लिए भी पुनर्वास (Rehabilitation) का नया रास्ता खोल रही है। Haryana News



