50 साल पुराना विज्ञान हुआ फेल! भारतीय वैज्ञानिकों ने जीव विज्ञान की किताबों को चुनौती देकर रचा इतिहास

विज्ञान जगत में बड़ा धमाका! भारतीय वैज्ञानिकों ने 50 साल पुरानी उस थ्योरी को पलट दिया है जो बैक्टीरिया के जीन रेगुलेशन को समझाती थी। बोस इंस्टीट्यूट की इस खोज ने टेक्स्टबुक्स को बदलने पर मजबूर कर दिया है। जानिए कैसे यह खोज भविष्य में जानलेवा बीमारियों के इलाज और एंटीबायोटिक दवाओं के निर्माण का तरीका पूरी तरह बदल देगी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Vinod Yadav
Vinod Yadav Verified Media or Organization • 27 Feb, 2026 Chief Editor
Mar 2, 2026 • 10:50 PM
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50 साल पुराना विज्ञान हुआ फेल! भारतीय वैज्ञानिकों ने जीव विज्ञान की किताबों को चुनौती देकर रचा इतिहास
50 साल पुराना विज्ञान हुआ फेल! भारतीय वैज्ञानिकों ने जीव विज्ञान की किताबों को चुनौती देकर रचा इतिहास

नई दिल्ली/कोलकाता: जीव विज्ञान (Biology) की दुनिया में एक ऐसी हलचल मची है जिसने आधी सदी से पढ़ाए जा रहे यूनिवर्सल सच को हिलाकर रख दिया है। भारत के बोस इंस्टीट्यूट (Bose Institute) के वैज्ञानिकों ने अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक ऐसी खोज की है जो बैक्टीरिया के जीवित रहने और उनके काम करने के तरीके को देखने का नजरिया ही बदल देगी। 

पिछले 50 वर्षों से दुनिया भर की टेक्स्टबुक्स (Textbooks) में यह पढ़ाया जा रहा था कि बैक्टीरिया अपने जीन को चालू या बंद करने के लिए एक खास सिग्मा साइकिल (σ cycle) का पालन करते हैं लेकिन भारतीय शोधकर्ताओं ने साबित कर दिया है कि यह नियम हर जगह लागू नहीं होता।

क्या था वो पुराना मॉडल और कैसे टूटा?

दरअसल वैज्ञानिकों का मानना था कि बैक्टीरिया में प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया यानी ट्रांसक्रिप्शन (Transcription - प्रतिलेखन) के दौरान सिग्मा फैक्टर नामक प्रोटीन आरएनए पॉलीमरेज (RNA Polymerase) से जुड़ता है और काम शुरू होते ही अलग हो जाता है। यह थ्योरी मुख्य रूप से ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पर आधारित थी।

लेकिन डॉ. जयंत मुखोपाध्याय के नेतृत्व में भारतीय टीम ने जब बैसिलस सब्टिलिस (Bacillus subtilis) पर रिसर्च की तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। उन्होंने पाया कि इस बैक्टीरिया में सिग्मा फैक्टर काम शुरू करने के बाद अलग नहीं होता बल्कि पूरी प्रक्रिया के दौरान साथ चिपका रहता है। 

यह खोज ठीक वैसी ही है जैसे हमें बताया जाए कि रॉकेट का बूस्टर इंजन अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद भी रॉकेट के साथ ही रहता है जबकि अब तक हम उसे अलग होता मान रहे थे।

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एंटीबायोटिक की दुनिया में आएगी क्रांति

यह खोज केवल किताबी बदलाव तक सीमित नहीं है। इस नई समझ (In-depth understanding) का इस्तेमाल करके वैज्ञानिक भविष्य में ऐसी एंटीबायोटिक्स (Antibiotics - जीवाणुरोधी दवाएं) तैयार कर सकते हैं जो सीधे बैक्टीरिया के इस स्विचिंग मैकेनिज्म को ब्लॉक कर सकें। 

इससे संक्रमण (Infection) रोकने के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही बायोफ्यूल और बायो-प्लास्टिक बनाने वाले सूक्ष्मजीवों को और अधिक कुशल (Efficient) बनाया जा सकेगा।

Frequently Asked Questions 5

यह एक जैविक प्रक्रिया है जो बैक्टीरिया को यह तय करने में मदद करती है कि कौन सा जीन कब सक्रिय (Activate) करना है। इसे ट्रांसक्रिप्शन की शुरुआत का मुख्य तंत्र माना जाता है।

टीम ने मुख्य रूप से 'बैसिलस सब्टिलिस' (Bacillus subtilis) पर शोध किया, जहाँ उन्होंने पुराने मॉडल के विपरीत परिणाम देखे।

इससे ऐसी नई दवाएं विकसित की जा सकेंगी जो उन बैक्टीरिया को मार सकें जिन पर पुरानी दवाएं बेअसर हो चुकी हैं। यह चिकित्सा विज्ञान के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।

नहीं, रिसर्च से पता चला है कि अलग-अलग प्रजातियों में सिग्मा फैक्टर का व्यवहार अलग हो सकता है। यही कारण है कि 'यूनिवर्सल मॉडल' की धारणा गलत साबित हुई।

यह ऐतिहासिक शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नल 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' (PNAS) में प्रकाशित हुआ है।
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Vinod Yadav Verified Media or Organization • 27 Feb, 2026 Chief Editor

विनोद यादव (Founder): NFL Spice News के फाउंडर और राइटर हैं। ज़िम्मेदार पत्रकारिता के प्रति मज़बूत कमिटमेंट के साथ, वह पाठकों को सच्चाई से जोड़ने और गहराई से, बिना किसी भेदभाव के न्यूज़ कवरेज देने की कोशिश करते हैं। विनोद यादव पिछले 10 सालों से ऑनलाइन मीडिया और प्रिंट मीडिया के साथ जुड़ें है।

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