President Murmu to IAS Officers: पदोन्नति के साथ बढ़ी जिम्मेदारी, 2047 के 'विकसित भारत' के लिए राष्ट्रपति ने दिया गुरुमंत्र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने IAS में शामिल हुए अधिकारियों को 'राष्ट्र प्रथम' का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि अब आप केवल एक क्षेत्र के प्रशासक नहीं, बल्कि देश के सुशासन के संरक्षक (Custodians) हैं। जानिए कैसे तकनीक, जमीनी अनुभव और मानवीय संवेदनशीलता के संगम से बनेगा 2047 का विकसित भारत। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के 128वें इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात की।
ये वे अधिकारी हैं जो राज्य नागरिक सेवाओं (State Civil Services) से पदोन्नत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए हैं। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि यह केवल पद का परिवर्तन (Change in designation) नहीं है, बल्कि जिम्मेदारियों का एक बड़ा विस्तार है।
विभागीय सीमाओं से ऊपर उठने की चुनौती
राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वे किसी विशेष क्षेत्र या विभाग तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक साइलो (Administrative silos) यानी विभागीय संकीर्णता को तोड़ना अनिवार्य है।
अब आपकी भूमिका एक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य (National perspective) की मांग करती है, जहाँ हर निर्णय का लक्ष्य साल 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के विजन के साथ मेल खाना चाहिए।
जमीनी अनुभव बनेगा बड़ी ताकत
इन अधिकारियों के पास राज्य सेवाओं में लगभग दो दशकों का जमीनी अनुभव (Grassroots experience) है। राष्ट्रपति ने इस अनुभव को उनकी सबसे बड़ी पूंजी बताया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनौतियों की गहरी समझ उन्हें नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेगी। उन्होंने "नेशन फर्स्ट" (Nation First) की भावना को सर्वोपरि रखते हुए समावेशी विकास (Inclusive development) पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया ताकि विकास का लाभ समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुंच सके।
भविष्य की सुशासन नीति: AI और संवेदनशीलता का मेल
आधुनिक शासन व्यवस्था (Modern governance) में तकनीक की भूमिका पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने अधिकारियों को AI-संचालित समाधानों (AI-driven solutions) और ई-गवेंस प्लेटफॉर्म को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
हालांकि उन्होंने एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, उसे मानवीय संवेदनशीलता (Human sensitivity) और विवेक के साथ पूरक होना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन में जलवायु अनुकूलन (Climate-adaptive governance) और स्थिरता को प्राथमिकता देने की सलाह दी ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
अंत में उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) के साथ-साथ अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की सलाह दी।

