पश्चिम एशिया में महाजंग के बीच PM मोदी का बड़ा कदम, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला से की बात; क्या टल जाएगा अगला खतरा?
पश्चिम एशिया में छिड़ी भीषण जंग के बीच PM मोदी ने जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला से फोन पर बात कर दुनिया को बड़ा संदेश दिया है। मिसाइल हमलों और अस्थिरता के बीच भारत ने शांति का रास्ता चुनने की अपील की है। क्या भारत की यह 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति इस महाजंग को रोक पाएगी? जानिए इस बातचीत के गहरे मायने और भारतीयों की सुरक्षा पर लेटेस्ट अपडेट।
नई दिल्ली/अम्मान: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण सैन्य टकराव और आसमान से बरसती मिसाइलों के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है।
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्डन के सुल्तान, किंग अब्दुल्ला II के साथ टेलीफोन पर लंबी बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक पूर्ण युद्ध (All-out war) की आहट दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से इस संवाद की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात को लेकर बेहद चिंतित है।
जॉर्डन जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण इस संघर्ष के केंद्र में फंसा हुआ है उसके लिए पीएम मोदी ने शांति, सुरक्षा (Security) और वहां के नागरिकों की भलाई के प्रति भारत के अटूट समर्थन को दोहराया।
जॉर्डन की धरती पर गिरते मलबे और भारत की फिक्र
हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान द्वारा इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों के दौरान जॉर्डन के हवाई क्षेत्र (Airspace) का इस्तेमाल हुआ जहां कई मिसाइलों और ड्रोनों को बीच में ही मार गिराया गया।
इसके मलबे से जॉर्डन में जान-माल का नुकसान हुआ है। पीएम मोदी ने जॉर्डन के इस कठिन समय में एकजुटता दिखाई और साथ ही वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों (Expatriate workforce) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किंग अब्दुल्ला का आभार व्यक्त किया।
रणनीतिक गहराई: भारत का 'पीस मेकर' अवतार
भारत केवल एक दर्शक नहीं बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। पीएम मोदी इससे पहले बहरीन और सऊदी अरब के नेताओं से भी बात कर चुके हैं।
भारत का रुख साफ है की संप्रभुता (Sovereignty) पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए लेकिन समाधान केवल संवाद (Dialogue) से ही संभव है।
यह संकट केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। वैश्विक विमानन (Aviation), ऊर्जा आपूर्ति (Energy supply) और व्यापारिक मार्ग (Trade routes) पूरी तरह बाधित हो चुके हैं।
भारत की चिंता अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लाखों कामगारों के भविष्य को लेकर भी है जो इस युद्ध की आग में झुलस सकते हैं।

