यूरोप का 'न्यूक्लियर गेमचेंजर': अब फ्रांस के परमाणु कवच में होंगे जर्मनी-पोलैंड, क्या पुतिन की बढ़ेगी टेंशन?
यूरोप में महायुद्ध की आहट के बीच फ्रांस ने अपनी परमाणु नीति बदलकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है! राष्ट्रपति मैक्रों ने जर्मनी और पोलैंड जैसे पड़ोसियों को भी फ्रांस के 'न्यूक्लियर कवच' में शामिल करने का एलान किया है। क्या अमेरिका से मोहभंग और रूस का डर यूरोप को परमाणु हथियारों की नई रेस में धकेल रहा है? जानिए इस ऐतिहासिक बदलाव की पूरी इनसाइड स्टोरी।
पेरिस/ब्रिटनी: दुनिया के बदलते भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालातों और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप ने अपनी सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक फैसला लिया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की है कि फ्रांस न केवल अपने परमाणु हथियारों (Nuclear Arsenal) का विस्तार करेगा बल्कि अपने यूरोपीय सहयोगियों को भी अपने परमाणु कवच (Nuclear Umbrella) के दायरे में लाएगा।
दशकों से यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और नाटो (NATO) पर निर्भर रहा है, लेकिन अमेरिका की बदलती विदेश नीति और डोनाल्ड ट्रंप के रुख ने यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा के लिए आत्मनिर्भर होने पर मजबूर कर दिया है।
ब्रिटनी में एक सबमरीन बेस से दिए गए ऐतिहासिक भाषण में मैक्रों ने स्पष्ट किया कि फ्रांस अब अपनी परमाणु क्षमता को फॉरवर्ड डिटरेंस (Forward Deterrence) यानी अग्रिम निवारण की रणनीति पर ले जा रहा है।
जर्मनी और पोलैंड के साथ नया गठबंधन
इस घोषणा का सबसे चौंकाने वाला पहलू जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों की इसमें सक्रिय भागीदारी है।
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) और मैक्रों ने एक संयुक्त बयान जारी कर न्यूक्लियर स्टीयरिंग ग्रुप (Nuclear Steering Group) बनाने का एलान किया है। अब जर्मनी की सेनाएं फ्रांस के परमाणु युद्धाभ्यास (Wargames) में हिस्सा लेंगी।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी पुष्टि की है कि उनका देश फ्रांस के साथ मिलकर परमाणु प्रतिरोध कार्यक्रम पर बातचीत कर रहा है।
मैक्रों का मास्टर स्ट्रोक और परमाणु शक्ति का विस्तार
वर्तमान में फ्रांस के पास लगभग 290 परमाणु हथियार हैं जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा जखीरा है। मैक्रों ने संकेत दिया है कि इस संख्या को अब बढ़ाया जाएगा।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु हमले का अंतिम फैसला (Decision-making) पूरी तरह से केवल फ्रांस के राष्ट्रपति के हाथों में ही रहेगा।
इस नई रणनीति का उद्देश्य रूस जैसे विरोधियों (Adversaries) को यह संदेश देना है कि यूरोप अब अपनी सुरक्षा के लिए किसी बाहरी शक्ति का मोहताज नहीं है।
क्या है इसका रणनीतिक महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूरोपीय संघ (European Union) को एक 'सैन्य महाशक्ति' के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
फ्रांस के लड़ाकू विमान अब यूरोप के अन्य हिस्सों में भी परमाणु मिशनों के लिए तैनात किए जा सकेंगे जिससे दुश्मन के लिए हमला करना और भी कठिन हो जाएगा।

